China did such a missile test which even America could not catch !!

चीन ने किया ऐसा मिसाइल परीक्षण जिसको अमेरिका भी नहीं पकड़ सका !!

महत्वपूर्ण बिन्दू

China did such a missile test which even America could not catch !! : चीन ने अपने यहा हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल का  परीक्षण कर लिया है। यह मिसाइल ना ही अमेरिका के पास है और ना ही रूस के पास है। यह मिसाइल दुनिया के तमाम विकसित देशों के पास भी नहीं है।

चीन ने यह मिसाइल परीक्षण कर लिया है लेकिन दुनिया को इसके बारे में कोई भी जानकारी नहीं दिया है। टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में इसको बहुत बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है। अमेरिका इस बात को लेकर काफी परेशान है लेकिन वह चीन को कुछ बोल नहीं पा रहा है। उसका सिर्फ इतना ही कहना है कि हम देख रहे हैं कि चीन हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल को किस प्रकार विकसित कर रहा है।

China did such a missile test which even America could not catch !!
China did such a missile test which even America could not catch !!

चीन, अमेरिका और रूस के बीच हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल बनाने के लिए होड़ मची हुई है!!

आप लोगों ने हाइपरसोनिक, सुपरसोनिक मिसाइल के बारे में कई बार सुने होंगे लेकिन हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल के बारे में पहली बार जानेंगे। मिसाइल दो प्रकार की होती हैं बैलेस्टिक मिसाइल और क्रूज मिसाइल लेकिन चीन के द्वारा बनाया गया है मिसाइल ना ही बैलेस्टिक मिसाइल है और ना ही क्रूज मिसाइल है यह अपने आप में एक तीसरी तरह का मिसाइल है।

UK का एक प्रसिद्ध अखबार The Financial Times में इस खबर के बारे में बताया गया है। लेकिन उस समय किसी ने इस खबर पर किसी ने ध्यान नहीं दिया लेकिन 2 महीने के बाद इस खबर को दुनिया के कई अखबारों ने प्रकाशित करना शुरू कर दिया। चीन से इस परीक्षण के बारे में पूछा गया तो उसने मना कर दिया कि हमारे यहां पर ऐसा कोई परीक्षण नहीं हुआ है।

हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल बनाने में चीन, अमेरिका और रूस के बीच इसी बात को लेकर होड़ मची हुई है की यह टेक्नोलॉजी सबसे पहले कौन बनाएगा। चीन ने सबसे पहले इस एस्ट्रोलॉजी को अपने यहां पर विकसित कर लिया है।

चीन ने हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल को दुनिया का चक्कर लगवा कर अपने टारगेट से मात्र 40 किलोमीटर दूर पर फोड़ा है। लेकिन यह परीक्षण करके चीन ने दुनिया को आश्चर्यचकित कर दिया है।

What is a Ballistic Missile? बैलेस्टिक मिसाइल क्या है?

Ballistic Missile यदि कोई देश अपने यहां से कोई मिसाइल किसी देश पर दागता है तो वह दो ही तरह से मिसाइल छोड़ता है पहला बैलेस्टिक मिसाइल इस मिसाइल के माध्यम से कोई देश मिसाइल को सीधा आसमान की तरफ ऊपर पर्वल्यकार भेजता है उसके बाद वह मिसाइल मुड़कर अपने टारगेट की ओर जाती है जिन्हें बैलेस्टिक मिसाइल कहा जाता है।

What is a Cruise Missile? क्रूज मिसाइल क्या है?

Cruise Missile : दूसरा यदि कोई देश अपने यहां से किसी मिसाइल को ऊपर न भेजकर सीधे किसी देश के तरफ मिसाइल छोड़ता है तो यह क्रूज मिसाइल होती है।

चीन ने दुनिया को मिसाइल परिक्षण में चकमा कैसे दिया?

चीन के द्वारा भेजा गया यह मिसाइल ऊपर तो गया लेकिन अपने टारगेट पर निचे कैसे आ गया इसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं हुई। चीन ने अपने यहां से यह मिसाइल सीधे ऊपर की ओर अंतरिक्ष में भेजा और अंतरिक्ष के चक्कर कटवाया। कई देशों ने यह समझा कि यह मिसाइल नहीं है बल्कि कोई सैटेलाइट है जो चीन के द्वारा लांच किया गया है। इस राडार को पकड़ने के लिए कई देश इंतजार कर रहे थे लेकिन यह बिना किसी रडार की पकड़ में आए सर्पिलाकर नीचे आ गई।

इसे हाइपरसोनिक ग्लाइडर मिसाइल नाम क्यों दिया गया है?

यह मिसाइल इतनी तेज अंतरिक्ष में भेजा गया कि किसी देश को मालूम ही नहीं चला। यह मिसाइल अंतरिक्ष मे इस तरह घूमता रहा कि दूसरे देशों को लगा कि कोई सेटेलाइट घूम रहा है। यह नीचे टेढ़ी-मेढ़ी आकृति में आई जिसको कोई भी देश नहीं पकड़ पाया और नीचे आकर आवाज की गति से 5 गुना तेज आवाज ब्लास्ट हुई। इसीलिए इसे हाइपरसोनिक ग्लाइडर मिसाइल नाम दिया गया है।

हाइपरसोनिक ग्लाइडर मिसाइल रडार की पकड़ में क्यों नहीं आता है?

दुनिया में हाइपरसोनिक मिसाइलो की कोई कमी नहीं है। लेकिन हाइपरसोनिक ग्लाइडर मिसाइल यह चीन में बनाया गया पहला मिसाइल है। जो रडार की पकड़ मे नहीं आती है। अमेरिका का कहना है कि अगर यह बैलेस्टिक या क्रूज मिसाइल होती तो इसे रडार से पकड़ा जा सकता है लेकिन हाइपरसोनिक ग्लाइडर मिसाइल होने के कारण इसे रडार से नहीं पकड़ सकते ।

कैसे पता चला कि चीन ने अपने यहां पर हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल का परीक्षण कर लिया है?

अगस्त 2021 में यह पता चला कि चाइना वालों ने एक ऐसा रॉकेट बनाया है जिसे Long March 5B के माध्यम से  रॉकेट  लॉन्च किया गया। वैसे ही Long March 5C रॉकेट 19 जुलाई को लॉन्च किया और दुनिया को बताया कि यह चीन का 77वा उड़ान है। 24 अगस्त 2021 को बताया की हमने एक और मिशन लॉन्च किया है जिसका नंबर 79 है।

लेकिन 78 वा लांच मिशन को किसी को नहीं बताया। इसी लॉन्चिंग नंबर को लेकर दुनिया को कन्फ्यूजन कर दिया है कि अगर चीन ने 78 वां लॉन्च नहीं किया है तो डायरेक्ट 79 वा लॉन्च कैसे हो गया । इस बात की जब जांच की गई तो यह पता चला कि चीन ने 78वा मिशन भी लांच किया था और यह चीन के द्वारा हाइपरसोनिक ग्लाइडर मिसाइल पर ही परिक्षण किया गया था।

अमेरिका और रूस हाइपरसोनिक ग्लाइडर मिसाइल से क्यों परेशान है?

रूस भी FOBS मिशन पर काम कर रहा है। रूस ने इस मिशन में यह तय किया था कि वह अंतरिक्ष में मिसाइल छोड़ेगा और जिस देश पर गिराना होगा उसे उस देश पर स्पेस से गिरा देगा। स्पेस से मिसाइल गिराने की प्रक्रिया को रूस 20 साल पहले ही बना रखा है।

लेकिन रूस द्वारा बनाया गया यह मिसाइल सिस्टम यदि किसी देश पर गिराया जाता है तो उस देश की रडार उसे पकड़ लेता है। लेकिन चीन द्वारा बनाया गया यह ग्लाइड सिस्टम रडार की पकड़ में नहीं आती है। इसी को लेकर अमेरिका और रूस काफी चिंतित है।

हाइपरसोनिक ग्लाइडर मिसाइल में किस तरह के इंजन का प्रयोग होता है?

इस सिस्टम में स्क्रेम जेट इंजन  का प्रयोग किया जाता है। यह आवाज की गति से 5 गुना तेज गति से उड़ता है। जितने भी तेज गति से चलने वाले मिसाइल या रॉकेट होते हैं उनमें सबसे उन्नत किस्म का इंजन लिया जाता है। इनको उड़ाने में जो सबसे उन्नत किस्म का इंजन होता है वह स्क्रेम जेट इंजन होता है। भारत भी अपना स्क्रेम जेट इंजन बना रहा है। स्क्रेम जेट इंजन से पहले राम जेट इंजन हुआ करता था।

क्रायोजेनिक इंजन और स्क्रेम जेट इंजन में क्या अंतर होता है?

Difference between cryogenic engine and scramjet engine : क्रायोजेनिक इंजन- क्रायोजेनिक इंजन उसे कहा जाता है जो बाहर से हवा नहीं लेता है। जब भी कोई मिसाइल छोड़ा जाता है तो रॉकेट में फ्यूल डालना पड़ता है। जो फ्यू जलकर ऊर्जा बनाता है। यह फ्यूल तरल अवस्था में होता है जो ज्यादा एरिया लेता है।

इसलिए उस फ्यूल को तरल से ठोस अवस्था में कन्वर्ट करके रॉकेट के अंदर भरा जाता है, जिसे हम क्रायोजेनिक कहते हैं। क्रायोजेनिक प्रक्रिया में तरल ईंधन को सॉलिड ईंधन में कन्वर्ट किया जाता है। ईंधन को जलने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है इसलिए उसमें ऑक्सिडाइजर मिलाए जाते। यह ऑक्सिडाइजर ईंधन के साथ रहकर उसे जलाने में मदद करता है।

स्क्रेम जेट- स्क्रेम जेट इंजन क्रायोजेनिक इंजन से बिल्कुल अलग होता है इसमें ईंधन को ठंडा रखने की जरूरत नहीं होती है। यह इतनी तेज गति से चलता है कि यह वायुमंडल में मौजूद ऑक्सीजन को अपनी ओर अवशोषित करके  ऑक्सिडाइजर के रूप में लेता है।

यह सबसे उन्नत किस्म का इंजन माना जाता है। क्रायोजेनिक इंजन बहुत लंबी दूरी की यात्रा करने के लिए काम में लिया जाता है। लेकिन अगर कोई मिसाइल आपको बहुत तेज गति से भेजना हो तो स्क्रेम जेट इंजन प्रयोग किया जाता है।

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