Global Minimum Tax Bill ग्लोबल मिनिमम टैक्स बिल क्या है?

Global Minimum Tax Bill
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Global Minimum Tax Bill : हाल ही में जी-7 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक में इस बात को लेकर चर्चा की गई है कि एक ऐसा टैक्स स्लैब बनाया जाए जिन देशों में कंपनियां में व्यापार करती हैं उनमें एक टैक्स स्लैब निर्धारित कर दी जाए। इन जी-7 देशों की मिनिमम टैक्स को निर्धारित करना ही ग्लोबल मिनिमम टैक्स है।

ग्लोबल मिनिमम टैक्स कहां लगेगा ?

जी-7 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक में यह निर्धारित किया गया है कि अब कंपनियों को उन्हीं देशों में टैक्स देना होगा जहां पर वह कंपनी अपना कारोबार करती है।

ग्लोबल मिनिमम टैक्स की आवश्यकता क्यों थी ?

जब ग्लोबल मिनिमम टैक्स नहीं लगाया जा रहा था उस समय गूगल फेसबुक जैसी बड़ी कंपनियां तमाम छोटे देशों से पैसा कमा कर अपने यहां ले जाती थी और वहा पर टैक्स भी नहीं देती थी लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

भारत में भी काम करने के लिए जितनी भी विदेशी कंपनियां आती थी वह सब कंपनी यहां काम करने के बाद मुनाफा कमाती थी और टैक्स भी नहीं देती थी। जिसके बाद भारत सरकार ने गूगल फेसबुक इन सबके ऊपर डिजीटल टैक्स लगा दिया था जिस टैक्स का विरोध अमेरिका ने किया था। इस विरोध के बाद ही जी-7 देशों की बैठक हुई।

यह कंपनियां पैसा कैसे कमाती थी?

यह कंपनियां पैसा कमाने के लिए गूगल, यूट्यूब ,फेसबुक आदि पर विज्ञापन (Advertisement) दिखाकर पैसे कमाती है। जो यहां से बहुत सारा पैसा कमा कर अमेरिका ले जाती है।

भारत सरकार जब उन कंपनियों से टैक्स मांगती थी तो यह कंपनियां अपनी सरकार की दुहाई देकर टैक्स नहीं देती थी। यह कंपनियां भारत सरकार की छोटी कंपनियों के साथ अपना कंपेयर करके कहती थी कि आपकी भी कंपनी तो हमारे यहां पर काम करती हैं।

जब यह कंपनियां भारत को टैक्स नहीं देती थी तो इस बात को लेकर भारत में कई जगह पर अपनी बात रखी है। भारत ने उन कंपनियों से कहा कि अगर आप पैसा कमा रहे हो तो डिजिटल टैक्स देना पड़ेगा। भारत के द्वारा डिजिटल टैक्स मांग करने पर दुनिया के बड़े देशों को यह समझ आ गया कि अब इस प्रकार व्यापार करना आसान नहीं है।

यह कंपनियां टैक्स कैसे बचाती थी

विदेशी कंपनियां भारत में व्यापार करने के लिए आती थी और अपना टैक्स बचाने के लिए वह कंपनियां अपना मुख्यालय ऐसे देशों में बनाती थी जहां पर टैक्स बहुत कम था या बिल्कुल ही नहीं था । वह अपना कारोबार भारत तथा दूसरे देशों में करती थी और अपना मुख्यालय किसी दूसरे देश में बता कर कोई टैक्स नहीं देती थी।

कितने देशों के बीच सहमति बनी

दुनिया के लगभग 130 देशों ने मिलकर फ्रांस की राजधानी पेरिस में आर्थिक सहयोग और विकास संगठन द्वारा इस बात पर सहमति बनी है कि आपको डिजिटल टैक्स के रूप में मिनिमम 15% टैक्स लेना ही है । जिसका अंतिम रूप अक्टूबर के लास्ट में दे दिया जाएगा और इसको 2023 में लागू कर दिया जाएगा।

इसके अंदर अब कुछ ऐसा नियम बना दिया गया है कि आप जिस देश से पैसा कमाएंगे टैक्स उसी देश को देना पड़ेगा पहले ऐसा नहीं होता था अब जितनी भी विदेशी कंपनियां भारत में आएंगी उनको भारत में ही डिजिटल टैक्स के रूप मे मिनिमम 15% टैक्स देना पड़ेगा।

किन देशों ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया ?

इस बैठक में 4 देशों ने हिस्सा नहीं लिया है जिनमे केन्या, श्रीलंका,पाकिस्तान और नाइजीरिया शामिल है।

विश्व आर्थिक सहयोग और विकास संगठन का मुख्यालय कहां पर है?

विश्व आर्थिक सहयोग और विकास संगठन ( World Organization for Economics Corporation and Development) का मुख्यालय फ्रांस की राजधानी पेरिस में है।

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