चक्रवाती तूफान कैसे बनते हैं ? How do cyclonic storms form

चक्रवाती तूफान कैसे बनते हैं ? How do cyclonic storms form. भारत में हिंद महासागर के अरब सागर या बंगाल की खाड़ी में जो चक्रवात आता है वह मार्च से मई के महीने में या फिर अक्टूबर से दिसंबर के महीने में आता है। 21वीं सदी में ऐसा तीसरी बार हुआ है कि सितंबर के महीने में ही ऐसे तूफान आ गया हैं।

गुलाब तूफान तो इस समय आया है लेकिन इससे पहले प्यार नामक तूफान भी आया था। सन 2005 में यह प्यार नामक तूफान आया था। दूसरे तूफान का नाम दया है यह दया नामक तूफान 2018 में आया था और इस समय सितंबर 2021 में जो तूफान आया था उस तूफान को गुलाब तूफान नाम दिया गया है।

चक्रवाती तूफान कैसे बनते हैं How do cyclonic storms form

तूफानों के नामकरण किस प्रकार होते हैं

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organization) के द्वारा दुनिया भर में तूफानों को लेकर जानकारी दी जाती है। उसने दुनिया के अंदर 6 पार्टीकूलर केंद्र बनाए हैं जहां से तूफानों के बारे में जानकारी दी जाती हैं एवं उनका नामकरण भी किया जाता है। इन 6 पार्टीकूलर केंद्रों में से एक पार्टीकूलर के अंदर नार्थ इंडियन ओसियन है।

इस नार्थ इंडियन ओसियन में 13 देशों का एक समूह है जो आपस में मिलकर अपने यहां पर आए तुफानो का नामकरण करते हैं। इन देशों में कोई भी देश अपनी मर्जी से तूफानों का नाम नहीं रख सकता क्योंकि अगर कोई देश किसी तूफान का नाम अपनी मर्जी से रखता है तो उन तूफानों के नाम को लेकर काफी कंफ्यूजन हो जाता है।

मान लीजिये कि किसी देश में कभी तूफान आता है तो वहां पर सहायता पहुंचाने के समय में नाम को लेकर काफी कंफ्यूजन हो जाता है।

इसीलिए इन देशों ने इन तूफानों का एक लिस्ट बना लिया है कभी भविष्य में कोई तूफान आता हैं तो उसका नाम हम लोग मिलकर कर अपनी सुविधा के हिसाब से रख लेंगे।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organization) में इन 13 देशों का नेतृत्व भारत करता है। जिसका मुख्यालय जेनेवा स्विट्जरलैंड में है।

तूफानों की आने के पीछे का कारण क्या है ?

सामान्यता कभी ना कभी आप लोग यह जरूर देखे होंगे कि आप के आस-पास हवा का एक बवंडर गर्मियों के दिन में गोल-गोल घूमता हुआ ऊपर उठता है। गांव में इसके बारे में यह कहा जाता है कि इस हवा के बवंडर में कोई भूत होता है जो इंसानों को भी उड़ा ले जा सकता है लेकिन यह मात्र एक अफवाह है।

यही बवंडर जब पानी के अंदर बन जाता है तो इसे चक्रवात कहते हैं इसमें हावा को नापने के लिए नॉट (Knot) का प्रयोग किया जाता है पानी के अंदर चल रही जहांजो के गति को भी नॉट में ही नापा जाता है।

1 नॉट=1.8किलोमीटर होता है।

अगर चलने वाली हवा जो गोल-गोल घूमती हुई ऊपर की ओर उठती है जिस की स्पीड 48 नॉट से 60 नॉट से ज्यादा होती है तो ऐसे सीरियर साइक्लोन कहा जाता है।

इससे ऊपर वेरी सीरियर नामक साइक्लोन होता है अगर हवा 64 नॉट से 89 नॉट की स्पीड से चलने लगे तो ऐसे तूफ़ान को वेरी सीरियर साइक्लोन कहा जाता है।

इससे ऊपर 90 नॉट से लेकर 119 नॉट तक यदि हवा की स्पीड होती है तो इस तूफान को एक्सट्रीमली सीरियर या भयंकर तूफान कहा जाता है।

इस भयंकर तूफान से भी ऊपर एक तूफान होता है जिसे सुपर साइक्लोन कहा जाता है। जिस की स्पीड 120 नॉट से ज्यादा होती है।

तूफानों का वर्गीकरण चार प्रकार का होता है

1.सीरियर 2. वेरी सीरियर 3.एक्सट्रीमली सीरियर 4.सुपर साइक्लोन

गुलाब तूफान क्या है?

गुलाब तूफान जिस स्पीड से आया था उसकी गति 48 नॉट से 60 नॉट था। इसलिए इस गुलाब तूफान को सीरियर केटेगरी में रखा गया है। इसका नाम पाकिस्तान द्वारा रखा गया है। यह तूफान उड़ीसा और आंध्र प्रदेश के तट पर आया था।

इसी समय दो तूफान एक साथ आया था जो तूफान बंगाल की खाड़ी के तरफ आया था उसका नाम गुलाब और ठीक उसके विपरीत जो तूफान अरब सागर की तरफ आया था उसका नाम शाहीन रखा गया है। इन दोनो तूफानों नाम भी पाकिस्तान ने ही रखा है।

इस तूफान में तूफान के साथ-साथ बहुत तेज बारिश भी आया था। जिससे तटीय इलाकों में बहुत भारी नुकसान हुआ था और छोटी मोटी दुकानें जो बनी हुई थी वह भी बारिश के पानी में बह गई।

चक्रवात क्यों आते हैं?

जिस जगह पर आप हवा को गोल-गोल घूमते हुए देखते हैं वहां पर जमीन का तापमान बढ़ने के कारण वहां पर उपस्थित हवा उठकर दूर चली जाती है। ऐसी स्थिति में जो आसपास की ठंडी हवा होती है उस खाली जगह को भरने के लिए तेज गति से वहां पर आ जाती है। जो वहां पर बवंडर का रूप ले लेती है। हवा उच्च दाब से निम्न दाब की ओर प्रवाहित होती है।

” चक्रवात के केंद्र में निम्न दाब होते हैं जिस कारण हवाए बाहर से अंदर की ओर आती है हवाओं के इस उत्क्रम को ही चक्रवात कहते हैं। “

उत्तरी गोलार्ध और दक्षिणी गोलार्ध में हवाएं किधर से किधर की ओर घूमती है?

उत्तरी गोलार्ध में जो हवाए घूमती है वह Anticlock Wise घूमती है। लेकिन वही हवाएं जब दक्षिणी गोलार्ध में चलती है तो यही हवाएं Clockwise घूमती है। उत्तरी गोलार्ध में हवाएं पूरब से पश्चिम की ओर चलती है और दक्षिणी गोलार्ध में यह हवाएं पश्चिम से पूरब की ओर चलती है ऐसा पृथ्वी पर लगने वाले कोरिओलिस बल के कारण होता है ।

समुंद्र में चक्रवात किस प्रकार आते हैं?

समुद्र में उत्पन्न तूफान को समुंद्री चक्रवात कहते हैं । भूमध्य रेखा पर स्थित समुंद्र का पानी गर्म होकर ऊपर उठता है जो समुंद्री चक्रवात का मुख्य कारण माना जाता है। इसमें समुंद्र के ऊपर की हवा सूर्य से ऊष्मा लेकर गर्म हो जाती है और ऊपर उठने लगती है। जब तापमान बराबर होता है तो यह चक्रवात समाप्त हो जाता है।

विश्व के प्रमुख चक्रवात:

टारनेडो: इसका आकार किप समान होता है । इसका ऊपरी भाग पक्षाभ बादल से जुड़े होते हैं जिसका निचला भाग भूमि से जुड़ा होता है। इसके आने से अंधेरा छा जाता है। इससे मुशलाधार बारिश होती है और बहुत से घरों को नुकसान भी हो जाता है। यह सबसे खतरनाक चक्रवात है जो अमेरिका में आता है।

  • जल स्तंभ: जब टारनेडो समुद्र के ऊपर आता है तो इसे जला स्तंभ कहते हैं।
  • हरिकेन: यह चक्रवात कैरीबियन सागर में आता है।
  • साइक्लोन: यह चक्रवात बंगाल की खाड़ी में आता है।
  • नीलम: यह चक्रवात बांग्लादेश में आता है।
  • टाइफून: यह चक्रवात चीन सागर में आता है।
  • विली विली: यह चक्रवात ऑस्ट्रेलिया (प्रशांत महासागर) में आता है।

प्रतिचक्रवात क्या है?

इसके केंद्र में उच्च दाब होता है इसमें हवाएं बाहर की ओर चलती हैं । यह खतरनाक नहीं होता है।

इसमें उत्तरी गोलार्ध में हवाएं (Clockwise) क्लॉक वाइज घूमती हैं अर्थात पश्चिम से पूरब की ओर चलती है जबिक दक्षिणी गोलार्ध में हवाएं (Anticlock Wise ) घूमती है अर्थात पूरब से पश्चिम की ओर चलती है।

निष्कर्ष

आज के इस लेख में हमने जाना की चक्रवाती तूफान कैसे बनते हैं How do cyclonic storms form हम उम्मीद करते हैं की आपको सभी को आज का हमारा यह लेख चक्रवाती तूफान कैसे बनते हैं How do cyclonic storms form पसंद आया होगा ।

यदि आपको हमारा यह लेख चक्रवाती तूफान कैसे बनते हैं How do cyclonic storms form अछा लगा हो तो कृपया इस लेख चक्रवाती तूफान कैसे बनते हैं How do cyclonic storms form को अपने सभी साथियों के साथ जरुर शेयर करें , ताकि वह लोग भी इसके बारे में जान सकें और समझ सकें ।

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आपका बहुत-बहुत धन्यबाद !

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