भारत ताइवान सेमीकंडक्टर डील India Taiwan Semiconductor deal

India Taiwan Semiconductor deal. दोस्तों हाल ही में भारत ने चीन के साथ एक चलाकी की है, कि चीन जिस प्रकार से भारत की कई आंतरिक मामलों में कोई न कोई कमेंट बाजी कर रहा है।

आजकल कश्मीर के मामले पर भी काफी बहस बाजी कर रहा है, पाकिस्तान उसका हितैसी बना हुआ है,और अफगानिस्तान में भारत के खिलाफ काम कर रहा है।

भारत भी कुछ ऐसा ही काम कर रहा है। भारत कोई काम चीन को नीचा दिखाने के लिए नहीं कर रहा है, बल्कि अपनी भलाई के लिए कर रहा है।
चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है। लेकिन ताइवान अपने आप को एक देश मानता है और सही मायनों में देखा जाए तो ताइवान एक अलग देश ही है।

भारत चीन से नहीं बल्कि ताइवान से 7.5 बिलियन डॉलर का एक समझौता कर रहा है। इंडियन रुपए में देखा जाए तो लगभग 55 हजार करोड़ रुपए का यह समझौता होगा।

India Taiwan Semiconductor deal

साथियों दुनिया के अंदर आजकल चिप का बहुत ही क्राइसेस आया हुआ है। यह चिप एक सेमीकंडक्टर डिवाइस के रूप में है। मार्केट पूरी तरह खुलने के बावजूद भी अगर कोई व्यक्ति कार, मोबाइल,या लैपटॉप खरीदने या बनवाने जा रहा है तो काफी समय लग रहा है। जिसका एक बहुत बड़ा कारण यह है कि मार्केट में सेमीकंडक्टर डिवाइस खत्म हो चुके हैं।

भारत इस कमी को दूर करने के लिए खुद से ही तो मेहनत कर ही रहा है लेकिन अंतरराष्ट्रीय रूप से बहुत सारे देशों के साथ बातचीत भी कर रहा है। इसी बातचीत के लिए भारत ताइवान से यह डील किया है।

ताइवान है क्या ? What is Taiwan?

ताइवान एक स्वतंत्र देश है जबकि चीन यह कहता है कि ताइवान कोई देश नहीं है बल्कि चीन का वह एक राज्य है। लेकिन भारत ने वन चाइना पॉलिसी पर साइन किया हुआ है। जिसके हिसाब से भारत भी ताइवान को चीन का ही हिस्सा मानता है आ रहा है।

लेकिन इसके बावजूद भी भारत चीन से नहीं बल्कि ताइवान से यह समझौता कर रहा है। जिससे चीन को यह लग रहा है कि इनडायरेक्टली भारत ताइवान को एक अलग देश के रूप में अब मानने लगा है।

भारत का रुख क्या है?

भारत यह चाहता है कि ताइवान खुद भारत आए और यहां इन्वेस्ट करके चिप का निर्माण करें। भारत के पूर्वोत्तर हिस्से पर चीन स्थित है, चीन से पूरब की ओर ताइवान है।

चीन जिस प्रकार हांगकांग को अपना मानता है उसी प्रकार ताइवान को भी अपना मानता है। लेकिन ताइवान चीन को अपना नहीं मानता है।

ऐसी स्थिति में चीन दुनिया को यह समझा रहा है कि चीन एक ही है दो नही। जबकि ताइवान यह कहता है कि वह भी एक अलग चीन है। लेकिन चीन का यह कहना है की पीपल रिपब्लिक ऑफ चाइना और डेमोक्रेटिव रिपब्लिक ऑफ चाइना दोनो एक ही है।

वन चाइना पॉलिसी क्या है ? What is One China Policy in Hindi

चीनी यह कहता है कि दुनिया के किसी देश को अगर चीन से व्यापार करना है तो वह वन चाइना पॉलिसी पर साइन करें। भारत भी वन चाइना पॉलिसी मानता है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो चाइना यह सिद्ध करना चाहता है कि कोई भी देश ताइवान को अलग देश ना माने, यही वन चाइना पॉलिसी कहलाता है।

भारत ने कुछ अपनी रणनीति में परिवर्तन किया है। और ताइवान से बातचीत करना शुरू कर दिया है।

ज्यादातर सेमीकंडक्टर डिवाइस कहां पर बनते हैं?

दुनिया में जितने भी सेमीकंडक्टर डिवाइस बनाए जाते हैं उसमें 80% डिवाइस ताइवान में या फिर साउथ कोरिया में बनाए जाते है। भारत और अमेरिका जैसे देश अपना ज्यादातर व्यापार चीन से ही करते आए हैं।

भले ही चीन वह सामान चाहे ताइवान से ही मांगाकर क्यों न देता हो। यही कारण है कि चाइना के बहुत सारे सेमीकंडक्टर निर्माता अमेरिका की कंपनी एप्पल के लिए या भारत के कंपनी के लिए सेमीकंडक्टर डिवाइस का सप्लाई नहीं कर पा रहे है। वर्तमान में चीन की हालात खराब है। वह सेमीकंडक्टर डिवाइस का निर्यात नहीं कर पा रहा है।

सेमीकंडक्टर डिवाइस क्या है? What is a semiconductor device?

सेमीकंडक्टर डिवाइस का उपयोग बहुत सी वस्तुओं में होता है । जैसे कि कार में कितना ईंधन है या गाड़ी कितनी स्पीड पर चल रही है इन सभी को नियंत्रित करने या डिस्प्ले करने में जिस डिवाइस का उपयोग होता है उसमें सबसे ज्यादा महत्व सेमीकंडक्टर का ही है।

आजकल जितनी भी गाड़ी आ रही है उनमें सेमीकंडक्टर डिवाइस का उपयोग बढ़ गया है। जितने भी इलेक्ट्रॉनिक गाड़ियां आ रही हैं जिनमे गाड़ी खराब होने के बाद कंप्यूटर से जिन गाड़ियों का इलाज हो जाता है उन सब में सेमीकंडक्टर डिवाइस का उपयोग होता है।

लेकिन इनका सप्लाई कम होने के कारण गाड़ियों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इस समय यदि आप कोई गाड़ी खरीदने जाते हैं तो आपको दुकानदार काफी वेटिंग करने का समय बता रहे है।

जिनी गाड़ियों में आधुनिक फीचर्स नहीं है वह गाड़ीया तो तुरंत मिल जा रही हैं।लेकिन जीन गाड़ियों में इस डिवाइस का प्रयोग हो रहा है उन गाड़ियों के लिए काफी लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

ऐसी स्थिति में देखा जा रहा है कि बहुत सारी कंपनियां गाड़ियों के उत्पादन में अर्थात बनाने में कमी कर दी हैं या फिर डेढ़ से 2 महीने का इंतजार के बाद कस्टमर को बेच रही हैं।

भारत भी अपने स्तर पर सेमीकंडक्टर डिवाइस का निर्माण करने के लिए कंपनियों से बोल रखा है की आप अपने स्तर पर ही इस डिवाइस को बनाना शुरू करिए।
जिसके लिए भारत ने ताइवान से यह बात करी है कि वह यहां आकर के सेमीकंडक्टर को बनाने में इन्वेस्ट करें और यहीं पर सेमीकंडक्टर बनाए। जिससे सेमीकंडक्टर का उत्पादन बढ़ाया जा सके।

अमेरिका ने भी अपने देश में इन चिप को बनाने के लिए 37 बिलियन डॉलर का इन्वेस्ट कर रखा है। जिससे की अमेरिका के भीतर ही सेमीकंडक्टर डिवाइस बनाया जा सके।

वर्तमान में इस चिप को बनाने के लिए टाटा कंपनी बढ़ चढ़ के आगे आई है। अगर ताइवान के द्वारा भारत में इन्वेस्ट होता है तो यह चीन के खिलाफ भारत की एक कूटनीतिक जीत होगी।

हम उम्मीद करते हैं की आपको सभी को आज का हमारा यह लेख भारत ताइवान सेमीकंडक्टर डील India Taiwan Semiconductor deal पसंद आया होगा ।
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