Kenya Somalia water dispute केन्या सोमालिया जल विवाद क्या है?

Kenya Somalia water dispute : केन्या और सोमालिया के बीच अपने-अपने समुद्री बॉर्डर को लेकर हमेशा विवाद रहता है। दोनों देश अपने समुद्री बॉर्डर को नहीं मानते हैं। हाल ही में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) जो द हेग नीदरलैंड में है उसने एक फैसला सुनाया हैं जिस फैसले पर सोमालिया ने कहा है कि कोर्ट के द्वारा किया गया फैसला सही है और केन्या ने कहा है कि इस फैसले को हम नहीं मानते हैं।

Kenya Somalia water dispute
Kenya Somalia water dispute

केन्या और सोमालिया के बीच विवाद क्या है?

केन्या और सोमालिया अफ्रीका महाद्वीप में स्थित अफ्रीकी देश है। इथोपिया, इरिट्रिया, जिबूती और सोमालिया इन चारों देश को हॉर्न ऑफ अफ्रीका के नाम से जाना जाता है। सोमालिया से सटा हुआ देश केन्या है। इन दोनो देशों के बीच समुद्री सीमा को लेकर विवाद चल रहा है।

केन्या ने अपने समुद्री क्षेत्र में एक सीधी रेखा खींची है और कह रहा है कि हमारी समुद्री रेखा यहां से लेकर यहां तक है। केन्या के द्वारा खींचा गया इस समुद्री रेखा को सोमालिया नहीं मान रहा है। इन दोनों के समुंद्री विवादित क्षेत्र की लंबाई 1 लाख किलो मीटर स्क्वायर है। केन्या और सोमालिया इस विवाद को लेकर यूनाइटेड नेशन की कोर्ट ऑफ जस्टिस के पास चले गए।

इन दोनों देशों के बीच देखा जाए तो जल के विवाद को लेकर नही बल्कि समुद्री क्षेत्र में उपस्थित तेल के भंडार को लेकर विवाद है क्योंकि इस समुद्री क्षेत्र में नेचुरल ऑयल का भरपूर भड़ार है। जिस पर केन्या चाहता है कि मेरा कब्जा हो जाए और सोमालिया चाहता है कि इस क्षेत्र पर उसका कब्जा पर हो जाए।

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस क्या है?

यूनाइटेड नेशन की प्रमुख संगठन में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस एक कोर्ट है जिसका मुख्यालय नीदरलैंड के द हेग में है। इस कोर्ट ऑफ जस्टिस में कुल 14 जज है। यह 14 जज दुनिया के किसी भी देश में हुए विवाद पर अपना फैसला सुना सकते हैं। जब भी यूनाइटेड नेशन के पास कोई भी देश अपनी समस्या लेकर पहुंचता है तो न्याय सुनाने के लिए यही जज बैठते है और यही से ही अपना फैसला सुना सकते हैं।

कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया है?

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने इन दोनों देशों के जल विवाद पर अपना फैसला सुना दिया है। उसने अपने फैसले में जो जल विवाद था उस विवाद को दोनों देशों के बीच आधा-आधा बटवारा करके सुलझा दिया है। इस फैसले से सोमालिया तो खुश हो गया है लेकिन केन्या इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया है।

अगर कोई देश इंटरनेशनल कोर्ट आफ जस्टिस का फैसला नहीं मानता है तो क्या होगा?

अगर कोई भी देश इंटरनेशनल कोर्ट आफ जस्टिस का फैसला नहीं मानता है तो उसकी शिकायत ICJ संयुक्त राज्य सुरक्षा परिषद से करता है। सिक्योरिटी काउंसिल एक ऐसी संस्था है जो इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के दिए गए फैसलों को किसी देश पर सख़्ती से लागू कराता है। शिकायत करने के बाद सिक्योरिटी काउंसिल उस देश पर बहुत सारा प्रतिबंध लगा सकता है।

सोमालिया और केन्या की आर्थिक स्थिति कैसी है?

सोमालिया समुद्री लुटेरों का देश है । जो आर्थिक रूप से काफी पिछड़ा हुआ देश है जबकि केन्या आर्थिक रूप से सोमालिया से ज्यादा शक्तिशाली है। भारत के कोस्ट गार्ड तो सोमालिया के समुद्री लुटेरों को भागने लिए अपहरण के नाम एक योजना चलाती है। केन्या के पास नेवी है और सोमालिया के पास समुद्री लुटेरे हैं । केन्या अपनी नेवी के माध्यम से सोमालिया को धमका रहा है।

आर्थिक रूप से केन्या सोमालिया से संपन्न है ऐसी स्थिति मे केन्या सोमालिया को हरा सकता है और इस विवादित क्षेत्र पर अपना कब्जा भी कर सकता है। केन्या और सोमालिया ने वर्ष 2009 में MOU पर हस्ताक्षर करके आपस में समझौता कर चुके है। इसी समुद्री क्षेत्र को लेकर जिस पर दोनों देशों की सहमति भी उस समय बन गई थी लेकिन इस समय केन्या इसको नहीं मान रहा है ।

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