Mullaperiyar Dam water dispute मुल्लापेरियार बांध जल विवाद क्या है ?

क्या है मुल्लापेरियार बांध जल विवाद ? What is the Mullaperiyar Dam water dispute ?

Mullaperiyar Dam water dispute : मुल्लापेरियार बांध जल विवाद भारत के 2 राज्य केरल और तमिलनाडु के बीच है। मुल्लापेरियार बांध केरल में है लेकिन इसके पूरे जल को तमिलनाडु इस्तेमाल करता है इसलिए दोनों राज्यों में इसको लेकर विवाद चल रहा है। मुल्लापेरियार बांध केरल के इडुक्की जिले में पश्चिमी घाट की कारडैमोम पहाड़ियों पर स्थित है। केरल इस बांध के पानी को नहीं इस्तेमाल कर सकता और ना ही इस बांध को तोड़ सकता है।

1895 में जब ब्रिटिश सरकार हुआ करती थी उस समय केरल त्रावणकोर के नाम से जाना जाता था। त्रावणकोर ने मद्रास के साथ एक समझौता किया जिसमें यह कहा गया कि त्रावणकोर की 5400 हेक्टेयर भूमि डैम बनाने के लिए ली जाएगी। इस भूमि को अंग्रेजों ने 999 साल के लिए किराये पर ले लिया। इस डैम को बने हुए 126 साल हो गए हैं।

केरल को इस बात का डर है कि यह डैम हमारे राज्य में बना है और उसका पानी तमिलनाडु इस्तेमाल कर रहा है अगर यह डैम टूट जाता है तो इसके पानी से केरल को ही नुकसान होगा। इसी बात से इडुक्की जिले से एक व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर दी।

जिसमें उसने बताया कि इस बांध को बने हुए 126 साल हो गए हैं और जिस गति से इस बांध में पानी भरा जा रहा है इसमें और अधिक पानी भरा गया तो हो सकता है कि यह बांध टूट जाएगा। पहाड़ पर बना हुआ यह बात अगर टूट गया तो इडुक्की जिला पानी में बह जाएगा। जिसमें उसने निवेदन किया कि कृपा करके इस डैम में और अधिक पानी ना डाला जाए।

Mullaperiyar Dam water dispute
Mullaperiyar Dam water dispute

केरल में पहले ही ज्यादा बारिश से यहां के हाल खराब है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हमने 2018 में यह कहा था कि इस डैम में 139 फीट ही पानी भरा जाए। तमिलनाडु सरकार का यह कहना है कि यह डैम हमारा है हमने इसे किराए पर ले रखा है। इसलिए इस डैम में 139 फीट नहीं 142 फीट पानी भरा जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने पैनल से यह कहा है कि आप दोनों राज्यों में इस बात को तय करें कि इस डैम में कितना पानी भरा जाए जिससे केरल को कोई दिक्कत ना हो । पैनल दोनों राज्यों के लड़ाई को देखते हुए 2014 में बनाया गया था। तमिलनाडु ने यह कहा है कि यदि इस डैम से आपको कोई दिक्कत है तो आप हम से पैसा ले लीजिए इसके चारों तरफ एक और दीवार बनाने के लिए।

केरल से तमिलनाडु से इसकी मरम्मत  के लिए 26 करोड़ रुपए भी ले लिए है। अगर डैम टूटता है तो केरल के इडुक्की जिला बाढ़ से डूब जाएगा और यदि इस डैम में पानी कम हुआ तो तमिलनाडु का मदुरई जिला सूखे से बेहाल हो जाएगा। मदुरई मे जो पानी आ रहा है वैगई रिवर के माध्यम से वह इसी मुल्लापेरियार डैम से आ रहा है।

मुल्लापेरियार डैम दो नदियों मूल्यार और पेरियार के कन्वर्जन पर बना हुआ है। पेरियार नदी जो कि केरल की लाइफ लाइन कही जाती है जिसकी लंबाई लगभग 244 किलोमीटर लंबी है जिसमें हर समय पानी भरा रहता है। तमिलनाडु वाले कहते हैं कि पानी हमें पूरा मिलना चाहिए क्योंकि अगर पानी नहीं मिला तो हमारा मदुरई प्यासा मर जायेगा।

केरल से तमिलनाडु पानी टनल्स के माध्यम से मुल्लापेरियार से वैगैई डैम से होते हुए वैगैई रिवर तक पहुंचाए जाते हैं। वैगैई रिवर मदुरई में पानी की किल्लत को दूर करता है। अगर दो राज्य पानी की समस्या को लेकर आपस में लड़ रहे हो तो आर्टिकल 226 के तहत उन राज्यों के विवाद को सुलझाया जा सकता है।

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