United Nation Security Council मे क्यों नहीं मिल रहा है भारत को स्थायी सीट और Veto पावर ?

United Nation Security Council : हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nation Security Council.) की अध्यक्षता किए हैं। यूनाइटेड नेशन काउंसिल के अंदर 5 परमानेंट और 10 नॉन परमानेंट सदस्य हैं। इन 15 लोगों को मिलाकर एक सिक्योरिटी काउंसिल बनी हुई है, उनकी अध्यक्षता 1 महीने के लिए भारत ने की है।

यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल (United Nation Security Council.) के एक स्पोक पर्सन Price से किसी पत्रकार ने यह पूछ कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का भारत अध्यक्षता कर रहा है तो क्या आप भारत को परमानेंट सीट दिलाने के पक्ष में है या भारत को वीटो पावर दिलाने के पक्ष में हैं।

United Nation Security Council मे क्यों नहीं मिल रहा है भारत को स्थायी सीट और Veto पावर ?
United Nation Security Council

उसके बाद उन्होंने जो जवाब दिया वह पूरी तरह भारत के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि हम यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल के विस्तार के पक्ष में है लेकिन किसी और को Veto देने के पक्ष में नहीं है। यानी अमेरिका ने यह संकेत दे दिया कि वह भारत को Veto पावर नहीं देना चाहता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन के डिपार्टमेंट के द्वारा यह बयान दिया गया है कि हम भारत को परमानेंट सीट नहीं दे सकते हैं। भारत काफी लंबे समय से परमानेंट मेंबर सीट हासिल करने के लिए प्रयास कर रहा है। जो बाइडेन से पहले डोनाल्ड ट्रंप और बराक ओबामा इंडिया को Veto पावर देने के पक्ष में थे।

अमेरिकी स्पोक पर्सन Price ने यह कहा है कि हमें यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल (United Nation Security Council.) में भारत के साथ काम करना अच्छा लगता है। हम यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल के सीटों को बढ़ाने के पक्ष में है लेकिन Veto पावर केवल 5 ही देशों के पास रहे हम इसके समर्थक हैं।

संयुक्त राष्ट्र संघ ( United Nations Organization ) का निर्माण कब किया गया ?

महत्वपूर्ण बिन्दू

दुनिया में दूसरा विश्व युद्ध 1939 से 1944 में हुआ था। पहला विश्व युद्ध और दूसरे विश्व युद्ध के बीच में मात्र 20 सालों का गैप था। 20 साल बाद दुनिया के बड़े बड़े देश एक बार फिर लड़ गए थे।

इसलिए दुनिया के देशों ने आपस में बैठकर यह निर्णय लिया कि क्यों नहीं ऐसा किया जाय की जितनी भी दुनिया के प्रभावशाली देश है उनका एक संगठन बनाया जाए जो आने वाले समय में फिर से कभी इस तरह के युद्ध देखने को ना मिले अर्थात तीसरा विश्व युद्ध ना हो।

इसी को देखते हुए 24 अक्टूबर 1945 को एक संगठन बनाया गया जिसका नाम संयुक्त राष्ट्र संघ ( United Nations Organisation) रखा गया। जिसमें यह निर्धारित किया गया कि दुनिया के सभी देशों को आपस में मिलाकर एक संगठन बनाया जाए और उस संगठन में आपसी सहमति से कोई भी निर्णय लिया जाए।

भारत को यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल (United Nation Security Council.) में स्थायी सीट क्यों नहीं मिली?

यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल में एक ऐसा पावरफुल बॉडी बनाया गया जो द्वितीय विश्वयुद्ध के विजेता बने थे। द्वितीय विश्वयुद्ध में अमेरिका,रूस,चीन,ब्रिटेन और फ्रांस विजेता थे। जिन्हें परमानेंट सीट मिली भारत को भी परमानेंट सीट देने की बात कही गई थी लेकिन भारत ने 1950 मे US के कहने पर भारत ने परमानेंट मेंबरशिप नहीं ली।

1955 मे USSR ने भी कहा था कि आप परमानेंट मेंबरशिप ले लीजिए लेकिन भारत ने उस समय भी परमानेंट सीट नहीं ली। जिसके बाद चीन के पास यह परमानेंट मेंबर शिप चली गई। दुनिया के अंदर 5 बड़े शक्तिशाली देश इस यूनाइटेड नेशन की अध्यक्षता करने के लिए हमेशा के लिए तैयार हो गए।

Non Permanent Member और Mermanent member का कार्यकाल कितना होता है?

यूनाइटेड नेशन मे 193 देशों की एक संस्था बनी जिसमें 5 परमानेंट और 10 नॉन परमानेंट अध्यक्ष बनाए गए। भारत नॉन परमानेंट मेंबर है और वह आठवीं बार नॉन परमानेंट मेंबर बना है। नॉन परमानेंट मेंबर का कार्यकाल 2 साल तक ही होता है जबकि परमानेंट मेंबर का कार्य जबसे यूनाइटेड नेशन बना है तब से आज तक चला आ रहा है।

यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल (United Nation Security Council.) का क्या कार्य होता है?

यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल (United Nation Security Council.) के अंदर कुल 15 सदस्य होते हैं। अगर कोई भी Regulation पास करना है किसी ऐसे देश पर जिससे पूरी दुनिया के ऊपर कोई संकट आ सकती हो तो यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल यह चाहता है कि उस देश को धमकाया जाए मान लीजिए नॉर्थ कोरिया दुनिया के अंदर अशांति का कारण बन गया ।

वह किसी दूसरे देश पर बम गिरा दिया तो अब दुनिया के ताकतवर देश आपस में मिलकर यह निर्णय करते हैं कि नॉर्थ कोरिया को सज़ा सब दिया जाय तो विश्वयुद्ध नहीं हो सकता। नॉर्थ कोरिया पर पांच ताकतवर देश मिलकर यह निर्णय लेते है कि नॉर्थ कोरिया किसी दूसरे देश पर बम ना फोड़े ।

लेकिन यदि कोई ताकतवर देश नार्थ कोरिया के समर्थन में आ जाए और दूसरा देश मना करे कि आप ऐसा नहीं कर सकते हैं तो दो महाशक्तियों को आपस में टकराने के कारण विश्व युद्ध हो सकता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए यूनाइटेड नेशन के अंदर एक प्रावधान रखा गया कि किसी भी मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र संघ यदि निर्णय लेता है तो वह आपसी सहमति से लेगा।

आपसी सहमति में 15 लोगों में से 9 लोगों की सहमति जरूरी होती है। किसी देश पर कोई प्रतिबंध लगाने में 9 लोगों की सहमति जरूरी होगी 9 देशों की सहमति अगर बन गई तो वह रेजुलेशन पास हो जाएगा। सहमति बनने के बाद ही किसी देश पर प्रतिबंध लगाया जाता है।

इसके बाद भी वह नहीं मानता है तो जो यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल (United Nation Security Council.) की 5 परमानेंट मेंबर की सेनाए है वह उस देश पर हमला कर देंगी। यूनाइटेड नेशन की डर के कारण ही वह देश किसी दूसरे देश पर आक्रमण नहीं करता है। जिससे पूरे दुनिया के अंदर शांति उत्पन्न हो जाएंगी।

Veto पावर क्या होता है? What is Veto Power?

यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल (United Nation Security Council.) में 5 Permanent Member और 10 Non Permanent Member होते हैं। टोटल 15 सदस्य होते हैं। टोटल 15 सदस्यों में किसी देश पर कोई प्रतिबंध लगाने के लिए 9 सदस्यों की सहमति जरूरी होती है।

अगर 9 सदस्यों में 4 परमानेंट सदस्य और 5 नॉन परमानेंट सदस्य मिलकर किसी देश पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहे हैं तो एक स्थायी सदस्य ( Permanent Member ) जो उसमें सामिल नही है वह अकेले ही 9 देशों के सदस्यों का फैसला बदल सकता है।

यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल (United Nation Security Council.) के स्थायी सदस्यों ( Permanent Member ) में कोई एक देश अकेले ही किसी फैसले को बदल देता हैं तो इसे ही Veto पावर कहा जाता है।

यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल (United Nation Security Council.) के 15 सदस्यों में किसी निर्णय पर अगर 14 सदस्य की भी सहमति बन जाए लेकिन यदि एक स्थायी सदस्य ( Permanent Member ) किसी निर्णय पर अपना मत नहीं देता है तो भी वह पूरे 14 सदस्यों के निर्णय को अकेले ही बदल सकता है जिसके बाद यूनाइटेड नेशन की सेनाएं किसी देश पर दबाव नहीं बना सकता यही Veto पावर कहलाता है।

यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल (United Nation Security Council.) से भारत क्या चाहता है?

यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल (United Nation Security Council.) में Veto पावर सिर्फ 5 स्थायी सदस्य ( Permanent Member ) के पास ही है इसलिए कहा जाता है कि 10 अस्थायी सदस्य ( NoN Permanent Member ) के पद पर होना उतना महत्वपूर्ण नहीं है। इंडिया आठवीं बार नॉन परमानेंट मेंबर बना है। और वह यह चाहता है कि उसे स्थायी सदस्य ( Permanent Member ) बनाया जाए ताकि वह किसी गलत निर्णय पर Veto कर सके।

यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल (United Nation Security Council.) ने 15 बार इजराइल के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया लेकिन अकेले अमेरिका के Veto कर देने से इजराइल के ऊपर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जा सका है। ऐसे ही भारत और पाकिस्तान के मुद्दे पर कई बार प्रस्ताव लाए गए लेकिन रूस ने भारत के पक्ष में Veto कर दिया जिससे भारत पर कोई एक्शन नहीं लिया जा सका। कहने का मतलब यह है कि Veto पावर सिर्फ पांच स्थायी सदस्यों के पास ही है।

G4 कंट्री में कौन कौन देश शामिल है?

भारत लंबे समय से अपनी दावेदारी पेश कर रहा है कि हमें स्थायी सदस्य ( Permanent Member ) मे शामिल कर दीजिए। भारत अकेला नहीं है जो यह दावेदारी कर रहा है। भारत के साथ साथ जापान, जर्मनी और ब्राजील ऐसे हैं जो वीटो पावर के लिए दावेदारी पेश करते हैं। जिन्हें हम जी G4 कंट्री के नाम से जानते हैं।

UFC ( United for Consensus ) मे कौन कौन देश शामिल है और वह अन्य देश को यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल (United Nation Security Council.) में क्यों नहीं शामिल होने देना चाहते है?

G4 कंट्री परमानेंट मेंबर शिप चाहते हैं लेकिन इनके विरोध में कई देश आ जाते हैं जो यह नहीं चाहते हैं कि कोई अन्य देश स्थायी सदस्य ( Permanent Member ) बने। विरोध करने वाले देशों में पाकिस्तान, साउथ कोरिया, इटली और अर्जेंटीना है। जिन्हें हम UFC ( United for Consensus ) के नाम से जानते हैं जो यह चाहते हैं कि यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल ( United Nation Security Council.) का विस्तार ही नहीं होना चाहिए।

इन चारों देशों की अपनी अपनी मजबूरी है जो सिक्योरिटी काउंसिल को विस्तार नहीं होने देना चाहते जैसे पाकिस्तान भारत को इसमें शामिल नहीं होने देना चाहता है क्योंकि वह जानता है कि भारत इस में शामिल हो जाता है तो उसके लिए काफी परेशानी होगी।

साउथ कोरिया जापान को परमानेंट मेंबर में शामिल नहीं होने देना चाहता है। साउथ कोरिया और जापान बहुत पुरानी दुश्मनी भी है। जापान ने साउथ कोरिया पर लगभग 50 वर्षों तक शासन किया है लेकिन बाद में अमेरिका ने इन दोनों को मित्र बना दिया।

यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल में 5 स्थायी सीटे उन्हें मिली थी जो द्वितीय विश्व युद्ध जीते थे। द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान जर्मनी इटली यह सभी हारे हुए देश थे। इटनी दोगले नेचर का है जो पहले जापान और जर्मनी के साथ मिलकर अमेरिका ब्रिटेन के खिलाफ लड़ा था बाद में वह इन दोनों के खिलाफ में लड़ा था।

इटली के इसी दोगले नेचर के लिए दुनिया में इज्जत नहीं दी जाती है क्योंकि तमाम बड़े देश जानते हैं कि वह पलटू किस्म का देश है। दुनिया के अंदर उसकी कोई इज्जत नहीं है इसलिए वह जानता है कि उसे परमानेंट मेंबर शिप नहीं मिल सकती।

अर्जेटिना अपने पड़ोसी राष्ट्रा ब्राजील से काफी जलता है।जो ब्राजील को आगे बढ़ता हुआ नही देख सकता है इसलिए वह उसे यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल में जगह नही देना चाहता है।

भारत यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल (United Nation Security Council. ) में स्थायी सदस्य (Permanent Member) और Veto पावर पाने के लिए क्या तर्क देता है?

भारत कहता है कि जापान, जर्मनी और ब्राजील को सामिल नही होने देना चाहते है तो आप हमे अपना समर्थन दे दीजिए क्योंकि हम दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक (Largest Democracy) सरकार रखते हैं।

आनेवाले समय में हम दुनिया की सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश भी होंगे। दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था ( Fastest Growing Economy) है। जब यूनाइटेड नेशन बन रहा था तो उस समय भी हमे शामिल करने के लिए दो बार मौके आए थे। लेकिन उस समय नेहरु जी ने अपनी सीट चीन को दे दी थी।

दुनिया में जितनी बार भी शांति स्थापित करने के लिए पीसकीपिंग फोर्स भेजी गई है उसमें इंडिया सबसे ज्यादा बार अपनी सेना शांति स्थापित करने के लिए भेजा है।
भारत यूनाइटेड नेशन की सभी सिद्धांतों पर सहमति रखता है। वह यूनाइटेड नेशन को ही वह मंच मानता है जहां से दुनिया के अंतरराष्ट्रीय विषयों पर चर्चा हो सकती हैं।

इंडिया 8 बार नॉन परमानेंट मेंबर बन चुका है। इंडिया परमाणु संपन्न देश होने के बावजूद भी यह कसम खाया है कि वह पहले किसी पर अटैक नहीं करेगा। इंडिया के पास दुनिया की सेकंड सबसे बड़ी सेना है। और दुनिया की 15% आबादी हम रखते हैं।

तो ऐसी स्थिति में हमें यूनाइटेड नेशन काउंसिल (United Nation Security Council.) के स्थायी सदस्य ( Permanent Member ) में शामिल होना ही चाहिए।इसलिए भारत हमेशा पक्षधर रहा है कि यूनाइटेड नेशन काउंसिल की वृद्धि की जाए और भारत को वहां पर परमानेंट मेंबर बनाया जाए।

यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल (United Nation Security Council.) में Permanent Member कितने है?

Permanent Member: यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल ( United Nation Security Council.) में अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन परमानेंट मेंबर है, जिन्हें हम P5 के नाम से जानते हैं। इसी P5 में दुनिया के अन्य देश शामिल होना चाहते हैं।

यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल ( United Nation Security Council.) में Non Permanent Member कितने हैं ?

Non permanent member: यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल मे 10 नॉन परमानेंट मेंबर नाइजर, ट्यूनीशिया, केन्या, वियतनाम, भारत, एस्तोनिया, मेक्सिको, आयरलैंड, नार्वे और सैंट विंसेंट एंड द ग्रेनडीनेस शामिल है।

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