What is America’s Lucy Mission? अमेरिका का लूसी मिशन क्या है?

What is America’s Lucy Mission? : हाल ही में अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक मिशन लॉन्च किया है, जिस मिशन को बृहस्पति ग्रह के पास भेजा गया है।

What is America's Lucy Mission
What is America’s Lucy Mission

इसका नाम लूसी क्यों रखा गया है?

इंसान जिस पृथ्वी पर रहता है वह उस पृथ्वी के इतिहास को जानने के काफी जिज्ञासा रखता है। आज के समय में इंसान जितना आगे जा रहा है उतना ही वह इतिहास के बारे में जानने की कोशिश कर रहा है। वैज्ञानिक किसी चीज को ऐसे ही नहीं मान लेते हैं वह उसके बारे में काफी लंबा रिसर्च करते हैं उसके बाद ही सही नतीजे पर पहुंचते हैं।

अफ्रीकी देश इथियोपिया में वैज्ञानिको ने 1974 में एक खोज की जिसमें उनको एक मानव कंकाल खुदाई में मिला। उस मानव कंकाल की यह विशेषता थी कि आज तक दुनिया में इससे पुराना मानव कंकाल नहीं मिले हैं। इस मानव कंकाल को ही लूसी नाम दिया गया है।

किस वैज्ञानिक ने लूसी (मानव कंकाल) की खोज की है?

जिस वैज्ञानिक ने लूसी की खोज की है उसका नाम डोनाल्ड जॉनसन था। डोनाल्ड जॉनसन के सम्मान में आज ऐस्टरौएड बेल्ट में एक ऐस्टरौएड का नाम जॉनसन भी रखा गया है। इस बार जो लूसी मिशन भेजा गया है यह लूसी जॉनसन के नाम पर रखे गए ऐस्टरौएड का भी चक्कर लगाएगा।

अगर यह इंसान के बारे में जानकारी दे सकता है तो यह हमें पृथ्वी के बारे में जानने की जो जिज्ञासा है कि पृथ्वी क्या पहले मंगल बृहस्पति जैसे ग्रह के जैसे ही थी इंसान की इसी जिज्ञासा की तलाश में यह लूसी मिशन बृहस्पति पर चक्कर लगाने के लिए भेजा गया है।

ट्रोजन क्या होते है?

असल में लूसी बृहस्पति का चक्कर नहीं लगा रहा है बल्कि यह बृहस्पति के साथ-साथ सूर्य के चक्कर लगा रहा है जो ट्रोजन है उनके बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए भेजा गया है। ऐस्टरौएड बेल्ट में जो पत्थर तैर रहे हैं वह ना तो मंगल पर हैं और ना ही बृहस्पति पर है।

अगर इस स्टोराइड बेल्ट से यदि कोई पत्थर बृहस्पति पर आ जाए तो वह पत्थर बृहस्पति का चक्कर नहीं लगाता है। यह बृहस्पति के साथ-साथ सूरज की उसी कक्षा में चक्कर लगा रहे हैं। बृहस्पति के साथ सूर्य की कक्षा में सूर्य का चक्कर लगा रहे ऐस्टरौएड को ट्रोजन कहते हैं। ट्रोजन एक प्रकार का छोटा तारा ही होता है।

ऐस्टरौएड बेल्ट क्या है?

सूर्य के चारों तरफ आठ ग्रह चक्कर लगा रहे हैं। जिनमें बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल ग्रह, वृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण है। मंगल ग्रह और बृहस्पति के बीच में पत्थरों की बहुत बड़ी बेल्ट है जिसमें पत्थर हमेशा तैरते रहते हैं। इन पत्थरों को ऐस्टरौएड एवं इन ऐस्टरौएड को एक साथ घूमने को ऐस्टरौएड बेल्ट (क्षुद्रग्रह बेल्ट) कहा जाता है।

लूसी मिशन क्यों भेजा गया है?

लूसी मिशन, बृहस्पति का चक्कर लगाने के लिए नहीं भेजा गया है बल्कि यह ट्रोजन का चक्कर लगाएगा। यह ऐसे ऐस्टरौएड है जो बृहस्पति की कक्षा में चक्कर लगा रहे हैं। असल में यह कयास लगाया जाता है कि पृथ्वी अपनी कक्षा में बिल्कुल शांति से सूर्य का चक्कर लगा रही है। मंगल भी जब चक्कर लगा रहा है तो उसकी कक्षा में भी कोई दूसरा ऐस्टरौएड चक्कर नहीं लगा रहा है।

तो बृहस्पति के साथ इतने सारे ऐस्टरौएड क्यों चक्कर लगा रहे है। क्या यह पहले से ही ऐसे था या कोई ऐस्टरौएड आपस में मिलकर इतने बड़े ग्रह का निर्माण कर लिए हैं। जब हम मंगल पृथ्वी का देखते हैं तो इनकी कक्षा में कोई दूसरा ग्रह चक्कर नहीं लगा रहा होता है तो ऐसा बृहस्पति के साथ क्यों हो रहा है कि इसकी ही कक्षा में छोटे-छोटे ऐस्टरौएड चक्कर लगा रहे हैं।

वैज्ञानिकों के दिमाग में इसी बात का पता लगाने के लिए जिज्ञासा है कि क्या यह छोटे-छोटे ट्रोजन कभी भविष्य में बृहस्पति में समाहित हो जाएंगे। अगर ऐसा होता है तो हम यह मान सकते हैं कि जो पृथ्वी इस समय है वह कभी ना कभी इन छोटे-छोटे ट्रोजन को आपस में मिल जाने के कारण इसका निर्माण हो गया हो।

बृहस्पति जो सूर्य से काफी दूर पर है वहां पर गुरुत्वाकर्षण भी नहीं है तो इसी कारण इन को आपस में मिलने में समय लग रहा हो लेकिन भविष्य में कभी यह आपस में मिलकर एक हो जाएंगे। वैज्ञानिकों ने लूसी मिशन के माध्यम से इसी बात का पता लगाने के लिए इसको अंतरिक्ष में भेजे हैं।

जिस प्रकार लूसी ने इंसान की इतिहास की जानकारी दी थी उसी प्रकार से लूसी मिशन के माध्यम से पृथ्वी के इतिहास के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। जिससे यह पता हो सकेगा के वास्तव में यह कैसे बनी थी।

यह मिशन कब तक पूरा हो जाएगा?

यह जो ट्रोजन 2021 में भेजा गया है यह पहले पृथ्वी का चक्कर लगाएगा फिर उसके बाद उसको बृहस्पति की तरफ भेज दिया जाएगा जो 2027-28 तक बृहस्पति तक पहुंचेगा और अपना मिशन 2033 तक पूरा करेगा। यह पृथ्वी से 600 करोड़ किलोमीटर की यात्रा पर गया है।
इस मिशन को पूरा करने में 7360 करोड़ रुपए की लागत आएगी।

यह मानव द्वारा भेजा गया ट्रोजन कैसे काम करेगा?

यह अपना सफर के दौरान सोलर पैनल के माध्यम से उड़ान भरेगा। यह अब तक का किसी भी जगह पर लगाए गए सोलर पैनल में सबसे बड़े सोलर पैनल होंगे। यह जब सोलर पैनल खुलेगा तो इसमें एक सोलर पैनल 7.5 मीटर लंबा हो जाएगा। इसकी कुल लंबाई 15 मीटर तक हो जाएगी। कहा जाता है कि इससे बड़ा सोलर पैनल अंतरिक्ष में कभी भी भेजा नहीं गया है।

भूटान और चीन के बीच तीन-चरणीय रोड मैप समझौता क्या है?

Kenya Somalia water dispute केन्या सोमालिया जल विवाद क्या है?

Hunger in India is more than in Pakistan क्या भारत में भुखमरी पाकिस्तान से भी ज्यादा है ?

Linkedin kya hai लिंकडीन क्या है What is Linkedin in Hindi

Blogger Kaise Bane ब्लॉगर कैसे बने पुरी जानकारी हिंदी में ? How To Become a Blogger

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top