ऑपरेशन ब्लू स्टार क्या है What is Operation Bluestar

खालिस्तान की मांग कब उठी ? When did the demand for Khalistan arise?

What is Operation Bluestar. इसी साल 6 जून 2021 को Operation Bluestar की 37वी वर्षगांठ मनाई गई है। भारत में कई जगहो पर खालिस्तान के समर्थन में नारे लगाए गए। खालिस्तान के समर्थन में कई जगहों पर खालिस्तानियो को याद किया गया।

जरनैल सिंह भिंडरवाला एक ऐसा व्यक्ति था जो पंजाब में खालिस्तान नाम से एक अलग देश की मांग कर रहा था। पंजाब में खालिस्तान का गढ़ अमृतसर था। इस पूरी घटना में एक तथ्य यह है कि भिंडरवाला जो अलग देश की मांग कर रहा था उसको जनता का भी समर्थन प्राप्त था। इसके पीछे का कारण यह है कि जो पाकिस्तान है, वह धर्म के आधार पर बना हुआ एक देश है।

ऑपरेशन ब्लू स्टार क्या है What is Operation Bluestar

इसी तरह धर्म के आधार पर पंजाब में भी खालिस्तान की मांग की जा रही थी। 1982 में खालिस्तान की मांग काफी जोरों पर उठने लगी।

ऑपरेशन ब्लू स्टार क्यों चलाया गया था ? Why was Operation Blue Star launched?

पंजाब के अमृतसर में स्वर्ण मंदिर है, जिसे हम हर मंदिर साहिब के नाम से जानते हैं। स्वर्ण मंदिर खालिस्तान की मांग करने वालों के लिए गढ़ बन गया था।

खालिस्तान की मांग को आगे बढ़ते देख 1984 में जरनैल सिंह भिंडरवाला को मारने के लिए ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाया गया था। ऑपरेशन ब्लू स्टार स्वर्ण मंदिर में भारतीय सेना के प्रवेश से जुड़ा हुआ मामला है।

भारतीय सेना के द्वारा इस मंदिर में प्रवेश किया गया और सबसे बड़ी बात जिससे पूरे विश्व में सिख समुदाय आहत हुआ वह यह थी कि इस स्वर्ण मंदिर में भारतीय सेना के द्वारा टैंक घुसाकर स्वर्ण मंदिर के छत को उड़ा दिया गया था। उसी छत से टूट कर गिरते हुए पत्थरों से भिंडरवाला की मौत हो गई।

केवल जरनैल सिंह भिंडरावाला की ही मौत नहीं हुई बल्कि सिखों के सबसे पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब के पन्नो को भी नुकसान हुआ। इस साल खालिस्तान की मांग कर रहे लोगों के द्वारा गुरु ग्रंथ साहिब के फटे हुए पन्नो को दिखाकर भीड़ को उकसाने की कोशिश की गई।

खालिस्तान की मांग कर रहे लोगों पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया?

1 जून 1984 को ऑपरेशन ब्लूस्टार की शुरुआत की गई थी। 6 जून 1984 को ऑपरेशन ब्लूस्टार को अंजाम दिया गया। भिंडरवाला को मारने के लिए स्वर्ण मंदिर में जब भारतीय सेना ने प्रवेश की तो उस समय के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी ने यह आदेश दिया था कि जितने भी खालिस्तानी समर्थक हैं उन्हें गोली मार दिया जाए।

स्वर्ण मंदिर पर हुए भारतीय सेना के हमले से सिखों में काफी नाराजगी थी जिसके कारण आगे चलकर इंदिरा गांधी को उन्हीं के सुरक्षा में लगे सिख सैनिक द्वारा 31 अक्टूबर 1984 में उनकी हत्या कर दी।

ऑपरेशन ब्लू स्टार से क्या क्षति हुई? What was the damage done by Operation Blue Star?

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भारत में कई जगहों पर हिंदू और सिखों में दंगे हुए। इस दंगों में लगभग 30,000 से ज्यादा सिखों की मौत हो गई। यह कोई छोटी मोटी घटना नहीं थी बल्कि यह उन घटनाओं में से है जिसकी स्थिति बड़ी भयावह थी।

इस ऑपरेशन मे 200 से ज्यादा सैनिकों और 1400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। यह वर्षगांठ वहां पर मारे गए आम लोगों की याद में मनाई जाती है।

खालिस्तान की मांग अचानक उठी या इसके पीछे कोई कारण था?

खालिस्तान की मांग करने के लिए सैनिकों को ट्रेनिंग दी गई थी। जरनैल सिंह भिंडरवाला ने सरकार से 1982 में खालिस्तान की मांग की थी। वह सरकार से यह चाहता था कि सरकार आनंदपुर रेजोल्यूशन पास करें और खालिस्तान को पंजाब से अलग कर दिया जाए।

भारत में राजनीति भी कई बार ऐसी चीजों के लिए जिम्मेदार होती है। BBC की रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि कांग्रेस ने ही 1982 में जरनैल सिंह भिंडरावाला को प्रमोट किया था। पंजाब में राजनीति आज भी क्षेत्रीय आधार पर देखी जाती है।

वहां पर एक क्षेत्रीय पार्टी भी है जिस पार्टी का नाम अकाली दल है। जिसको काउंटर करने के लिए कांग्रेस का यह सोच था कि वहीं पर किसी लोकल नेता को खड़ा किया जाए। लेकिन उन्होंने यह कभी भी नहीं सोचा था कि आगे चलकर जरनैल सिंह भिंडरावाला एक अलग देश की मांग करने लगेगा।

जरनैल सिंह भिंडरावाला को पाकिस्तान का भी समर्थन प्राप्त था। पाकिस्तान उनको यह कह रहा था कि आप अलग देश की मांग करिए। जिससे प्रभावित होकर जरनैल सिंह भिंडरावाला ने खालिस्तान की मांग कर रहा था।

पाकिस्तान की मंशा क्या थी ?

पाकिस्तान 1971 में भारत से मिले हार को पचा नहीं पा रहा था क्योंकि इंदिरा गांधी जी ने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दी थी। जिसमें इंदिरा गांधी ने पूर्वी पाकिस्तान को बांग्लादेश में तोड़ दिया।

जिससे पाकिस्तान को लग रहा था कि वह भारत से भी पंजाब को अलग कर देगा इसलिए वह खालिस्तान के मांग को सपोर्ट कर रहा था।

ऑपरेशन ब्लू स्टार किस प्रकार चलाया गया ?

खालिस्तान की मांग कर रहे भिंडरवाला को जब भारतीय सेना स्वर्ण मंदिर में पकड़ने गई तो पता चला कि जो लोग खालिस्तान की मांग कर रहे हैं उनके पास भारी मात्रा में मोटार्स और बंदूके है जिनसे भारतीय सेना लंबे समय तक 4 बटालियन के नेतृत्व में लड़ती रही तब भी वह उनसे पार नहीं पा सकी।

खालिस्तान की मांग कर रहे लोग इतनी मुस्तैदी के साथ भारतीय सैनिकों से लड़ रहे थे कि भारतीय सेना द्वारा जब आंसू गैस के गोले छोड़े गए तो इसके लिए उन्होंने पहले से ही सेंड बैक लगा रखे थे जिससे कि हमारे सैनिक ही घायल होने लगे।

उसके बाद भारतीय सेना द्वारा टैंकर मंगाए गए। टैंकर की लाइट से उनके ऊपर रोशनी की गई जो उनकी आंखों पर प्रभाव डाल रही थी। लेकिन इस टैंकर की लाइट में यह खराबी थी कि जितनी तेज गति से यह रोशनी पैदा कर रहा था उसके कुछ ही समय बाद वह फ्यूज हो जाता था।

इस टैंकर से भी सैनिक उनके ऊपर कुछ नहीं कर पाए,क्योंकि रात में यह मिशन चल रहा था इसलिए जब अंधाधुंध गोलियां चल रही थी तो मुसीबत यह हुआ कि यह मिशन अगर दिन में किया गया होता तो हो सकता है कि खालिस्तान के समर्थन में ज्यादा लोग जुट जाते।

इसलिए भारतीय सेना ने उस छत को ही उड़ा दिया जहां से खालिस्तानी समर्थक हमला कर रहे थे। छत उड़ाने के बाद जब छत के मलवे उनके ऊपर गिरने लगा तो अचानक वहां पर भगदड़ मच गई। भगदड़ के बाद जब खालिस्तानी समर्थक बाहर निकलने लगे तो उसके बाद भी यह कंफर्म नहीं हो पाया कि जरनैल सिंह भिंडरवाला मारा है या नहीं।

पाकिस्तान द्वारा क्या अफवाह फैलाई गई ?

भारतीय सेना को जरनैल सिंह भिंडरावाला के मारे जाने की खबर जैसे ही सामने आई तो उस समय पाकिस्तान के द्वारा यह स्टेटमेंट दिया गया कि भिंडरवाला पाकिस्तान में है।
पाकिस्तानी मीडिया द्वारा यह कहा गया कि भिंडरवाला को बहुत जल्द वह लाइव टीवी पर दिखाएंगे जिसमें भिंडरवाला अपनी पूरी कहानी सुनाएंगे।

चूकि यह घटना 6 जून 1984 की थी , जिसमें भारत सरकार द्वारा जब सेना से पूछा गया कि आप लोग कह रहे हैं कि भिंडरवाला मारा गया है और जब कि पाकिस्तान कह रहा है कि भिंडरवाला बचकर पाकिस्तान में आ गया है। ऐसी स्थिति में आपका क्या तर्क है।

भारतीय सेना ने क्या जवाब दिया ?

भारतीय सेना ने जवाब दिया कि पाकिस्तान केवल हमारे द्वारा किए गए कार्यों में बाधा उत्पन्न कर रहा है। उनके पास कोई भी भिंडरवाला नहीं है। अगर भिंडरवाला जिंदा होता तो स्वर्ण मंदिर में उसके समर्थक वहां से निकलकर बाहर नहीं आते।

भारतीय सेना ने यह नोटिस किया कि भिंडरवाला के मारे जाने के बाद उसके समर्थक उसके पैरों को चूम रहे थे, और यह कह रहे थे कि हमारा नेता अब मर चूका है। आगे चलकर इस घटना के बाद भयंकर सिख दंगे हुए और इंदिरा गांधी की भी हत्या हो गई।

राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड NSG (National Security Guard.) का गठन क्यों किया गया ?

इंदिरा गांधी के मारे जाने के बाद पूरे भारत में फिर सिख दंगे हुए। जिसके बाद भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड National Security Guard. NSG Act. 1986 लाया गया। जिसके तहेत NSG (National Security Guard.) का गठन किया गया।

जिसका यह उद्देश्य था कि आगे भविष्य में ऑपरेशन ब्लू स्टार जैसी घटनाओं को कंट्रोल किया जा सके। यही कारण है कि अक्षरधाम की जो घटना हुई थी उसमें भी NSG कमांडो का उपयोग किया गया था। अगर भारत में कहीं पर भी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हुई घटना होती है तो आज भी NSG कमांडो को बुलाया जाता है।

इस पूरे लेख में अगर किसी के भावनाओं की कोई ठेस पहुंची हो तो हमारा उद्देश्य आपकी भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। हमने सिर्फ उस घटना को इस लेख में बताया है जिस घटना के प्रमाण भारत में उपलब्ध है।

निष्कर्ष

आज के इस लेख में हमने जाना की ऑपरेशन ब्लू स्टार क्या है ( What is Operation Bluestar.) हम उम्मीद करते हैं की आप सभी को आज का हमारा यह लेख ऑपरेशन ब्लू स्टार क्या है ( What is Operation Bluestar.) पसंद आया होगा ।

यदि आपको हमारा यह लेख ऑपरेशन ब्लू स्टार क्या है ( What is Operation Bluestar.) अछा लगा हो तो कृपया इस लेख ऑपरेशन ब्लू स्टार क्या है ( What is Operation Bluestar.) को अपने सभी साथियों के साथ जरुर शेयर करें , ताकि वह लोग भी इसके बारे में जान सकें और समझ सकें ।

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