What is the dispute between Ukraine and Russia? यूक्रेन और रूस के बीच क्या विवाद है?

What is the dispute between Ukraine and Russia
What is the dispute between Ukraine and Russia

What is the dispute between Ukraine and Russia : रूस ने, NATO के सदस्यों को चेतावनी दिया है कि यदि आप यूक्रेन को इसका सदस्य बनाते हैं तो इसके परिणाम घातक होंगे। नाटो के सदस्यों का हमेशा से रूस के प्रति अच्छा व्यवहार नहीं रखते है।

NATO क्या है? (North Atlantic Treaty Organization)

जब दुनिया मैं दूसरा विश्व युद्ध चल रहा था उस समय अमेरिका और USSR आपस में लड़ रहे थे। USSR कहता था कि हम साम्यवादी विचारधारा को मानते हैं और वही US का कहना यह था कि हम पूंजीवादी विचारधारा को मानते हैं। पूंजीवाद का मतलब यह है कि पैसे वाला व्यक्ति या देश, और धनी हो जाए। साम्यवाद का मतलब यह है कि संसाधनों पर सबका अधिकार हो।

इसी विचारधारा को लेकर दोनों देश के विचार अलग-अलग थे। यह दोनों देश द्वितीय विश्व युद्ध तो जीते थे मगर इन विजेताओं में वर्चस्व की लड़ाई हो गई। वर्चस्व की यह लड़ाई शुरू हुई जिसे दुनिया शीत युद्ध के नाम से जानती है। अमेरिका को इस बात का डर था कि रूस ताकतवर है, इसलिए US ने USSR को तोड़ने के लिए एक 4 अप्रैल 1949 को संगठन बनाया जिसका नाम NATO(North Atlantic Treaty Organization) रखा गया। अमेरिका ने उस समय विजेता राष्ट्रों को आपस में मिलाया और उनको बताया कि हम सभी देश को आपस में पूंजीवाद की विचारधारा को मानना है।

वारसा पैक्ट WTO क्या है? (Warsa Treaty Organization)

अमेरिका द्वारा नाटो का निर्माण कर लेने के बाद USSR (Union of Soviet Socialist Republics.) यह सोच रहा था कि अमेरिका दूसरे देशो से आपस में मिलकर 30 देशो का एक संगठन बना लिए और हम अकेले रह गए। यह सभी देश मेरे खिलाफ हो गए हैं। उसने अपनी सुरक्षा के लिए वारसा पैक्ट तैयार कर लिया। जिसे हम WTO (Warsa Treaty Organization) के नाम से जानते हैं। यह वारसा पैक्ट नाटो देशों से अपनी सुरक्षा के लिए और उस द्वारा बनाया गया एक संगठन है।

शीत युद्ध क्या है?

रूस और अमेरिका ने अपना अलग अलग संगठन बनाया था। यह दोनों देश डायरेक्ट एक दूसरे से नहीं लड़ रहे थे बल्कि दुनिया के देशों को आपस मे लडवाते थे और उसे सुलझाने के लिए पहुंच जाते थे। इसे शीत युद्ध के नाम से जान गया। इस शीत युद्ध में अमेरिका जीत गया। जीतने के बाद अमेरिका ने USSR (Union of Soviet Socialist Republics) को 1991 मे कुल 15 देशों में तोड़ दिया ।

उन 15 देशों में सबसे बड़ा देश रूस बना। इन 15 देशों में ही एक देश यूक्रेन है। जिसको नाटो देशों में शामिल होने को लेकर विवादो रहा है। रूस ने चेतावनी दी है और कहा है कि नाटो देश यूक्रेन को नाटो का सदस्य न बनाए । यह यूक्रेन कभी हमारे ही देश का हिस्सा था इसलिए यह नाटो का सदस्य नहीं बन सकता है।

आखिर यूक्रेन नाटो देशों में क्यों शामिल होना चाहता है इसके पीछे का क्या कारण है?

रूस और यूक्रेन जब कभी एक ही में हुआ करते थे तो उस समय के राष्ट्रा अध्यक्ष ने यूक्रेन को एक क्रीमिया नामक जगह को गिफ्ट में दिया था। उन्होंने ऐसा इसलिए किया था क्योंकि यूक्रेन के पास जमीन का हिस्सा कम था और रसिया के पास इतना बड़ा क्षेत्रफल था इसलिए उन्होंने इसमें से कुछ हिस्सा यूक्रेन को दे दिया था।

यूक्रेन का यह छोटा सा हिस्सा जो कभी गिफ्ट में मिला था उसको 1991 में जब USSR टूटा और रूस एक अलग देश बन गया। उस समय रूस ने यूक्रेन से क्रीमिया नामक जगह को वापस मांग लिया यह कहते हुए कि इसको हमने आप को गिफ्ट दिया था। जब यूक्रेन क्रीमिया नामक जगह को उसको देने से मना कर दिया तो रूस ने इस क्रीमिया नामक जगह को जबरन कब्जा कर लिया। इसलिए यूक्रेन नाटो में शामिल होना चाहता है।

अमेरिका ने रूस को G8 संगठन से क्यों बाहर कर दिया?

यूक्रेन जब नाटो का सदस्य बनने के लिए तैयार हो गया तो नाटो ने यह धमकी दे दिया कि रूस यदि यूक्रेन के क्रीमिया नामक जगह के विवाद में पढ़ता है तो US उसे G8 संगठन से बाहर कर देगा। लेकिन अमेरिका की इन बातों को नजर अंदाज करते हुए जब रूस ने यूक्रेन पर हमला करके क्रीमिया को कब्जा लिया तो अमेरिका ने रूस को G8 से बाहर निकाल दिया इस लिए इस संगठन में 7 सदस्य बचे हैं। जिसे G7 के नाम से जानते है।

यूक्रेन की मजबूरी क्या है?

यूक्रेन के अंदर व्यापार करने के लिए दो ही सी-पोर्ट मौजूद हैं जिनमें पहला बार्डिनेक्स और दूसरा मैरियापोल हैं। इन दोनों सी-पोर्ट से अगर व्यापार करने के लिए यूक्रेन ब्लैक सी के तरफ जाता है तो रूस ने वहां पर अपने जहाजों को तैनात कर रखा है। इससे यूक्रेन काफी परेशान हो गया है ।

इसीलिए नाटो देशों यूक्रेन के समर्थन में आ गए हैं और नाटो ने कहा है कि अगर रूस नहीं मानता है तो उसके ऊपर नाटो देश हमला कर देंगे। जिस पर रूस ने यह कहां है कि यदि नाटो के कोई भी देश यूक्रेन और रसिया के बीच इस आंतरिक मामले में आने की कोशिश की तो  इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

इसी को देखते हुए रूस ने इस समय अपना सैनिक अभ्यास करना शुरू कर दिया है जिसमें उसने 40 युद्धतोप, 30 लड़ाकू विमान, 8000 सैनिकों के साथ युद्ध अभ्यास कर रहा है।

NATO में कुल कितने देश है? (NATO(North Atlantic Treaty Organizatio)

नाटो की स्थापना 4 अप्रैल 1949 को वाशिंगटन में हुई।जिसका मुख्यालय बेल्जियम में है। जिनमें कुल 30 सदस्य देश हैं: अल्बानिया, बेल्जियम, बुलगारिया, कनाडा, क्रोएशिया चेक गणतंत्र, डेनमार्क, एस्तोनिया, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस(यूनान), हंगरी, आइसलैंड, इटली, लातविया, लिथुआनिया, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड, नार्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, स्पेन, तुर्की, मैसिडोनिया, मॉन्टिनीग्रो, अमेरिका और ब्रिटेन है।

G7 मे कौन कौन देश है?

G7 मे कुल 7 देश है जिनमे कनाडा, फ्रांस, जमानी, इटली, जापान, अमेरिका और ब्रिटेन शामिल है। रूस इस संगठन में 1998 में शामिल हुआ था लेकिन उसे 2014 में इस संगठन से बाहर कर दिया गया।

सोवियत संघ (USSR) कुल कितने देशों में टूट गया ?

26 दिसंबर 1991 को सोवियत संघ (USSR) कुल 15 देशों में टूट गया उन देशों के नाम निम्नलिखित है:
1- लिथुआनिया
2- लातविया
3- ऍस्तोनिया
4- कज़ाखस्तान
5- किर्गिज़्स्तान
6- ताजिकिस्तान
7- तुर्कमेनिस्तान
8- उज़्बेकिस्तान
9- बेलारूस
10- माल्डोवा
11- यूक्रेन
12- रूस
13- आर्मेनिया
14- अज़रबैजान
15- जॉर्जिया

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