What is the three phase road map agreement between Bhutan and China?

भूटान और चीन के बीच तीन-चरणीय रोड मैप समझौता क्या है?

Bhutan and China : इस समय भूटान, चीन से बात चीत कर रहा है। भूटान और चीन के बीच Memorandum of Understanding (MOU) पर हस्ताक्षर हुए हैं। जिसमें कहा गया है कि भूटान चीन के साथ मिलकर तीन-स्तरीय वार्ता के मध्यम से अपने सीमा विवाद को सुलझा लेगा। जैसा आप सब जानते हैं कि भारत और भूटान के बीच गहरी दोस्ती है। वह भूटान की रक्षा का जिम्मेदारी ले रखा है ।

Bhutan and China
Bhutan and China

भारत और भूटान मित्रता संधि क्या ?

1949 मे भारत और भूटान ने मित्रता संधि की थी, जिस संधि में यह कहा गया था कि भूटान अगर दुनिया के किसी भी देश के साथ कोई बात करता है तो उसे भारत को बताना होगा। इसके बदले भारत ने भूटान को यह गारंटी दिया था कि भूटान के ऊपर दुनिया का कोई भी देश आंख उठा कर नहीं देख सकता।

यही कारण था कि 2017 में भूटान के डोकलाम पर जब चीनी सैनिक आ गए थे तो उस समय भारत ने अपनी सेना भेजी थी। इस डोकलाम पर लगभग 75 दिनों तक भारतीय सेना चीनी सैनिकों के सामने डट कर खड़ी रही और चीनी सैनिकों को वापस जाने पर मजबूर कर दिय।

भूटान में भारत की मित्रता संधि में क्या संशोधन किया है?

भूटान ने 1949 में भारत के साथ किए गए मित्रता संधि को 2007 में संशोधन कर दिया । जिसमें भूटान ने यह कहा कि दुनिया के किसी भी देश से बात करते समय हम आपको तभी बताएंगे जब आपके हित प्रभावित हो रहे हो। उसी संशोधन का ही परिणाम है कि आज भूटान चीन से आपस में बात कर लिया है और एक MOU पर साइन भी कर लिया है।

तीन-स्तरीय रोड मैप बना लिया है लेकिन भारत को या नहीं बताया है कि तीन-स्तरीय रोड मैप क्या है। चीन और भूटान के सोशल मीडिया एवं अखबारों में तीन -स्तरीय रोड मैप का काफी तारीफ हो रहा है। चीन के लोगों को लग रहा है कि अब भूटान और चीन दोनों देश एक दूसरे के करीब आ रहे हैं।

क्या चीन और भूटान के बीच पहले भी वार्ता हुई है?

ऐसा क्या हो रहा है Bhutan and China के बीच जिसके बारे में भारत को पता नहीं है और भूटान को पता है, जब इसी बात को लेकर भारतीय पत्रकारों ने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से यह पूछा तो उन्होंने बताया कि यह पहली बार नहीं हो रहा है भूटान और चीन 1984 से आपस में बात कर रहे हैं।

भूटान और चीन इस तीन-चरणीय वार्ता को इससे पहले भी 24 बार बात कर चुके हैं लेकिन इसका समाधान आज तक नहीं निकला है। इस बात पर भारत का कहना है कि इससे पहले आपने इतनी वार्ताएं की है तो इसकी जानकारी हमें पहले क्यों नहीं बताए हैं।

चीन, भूटान के कीन हिस्सों को अपना बता रहा है?

इस समय भूटान के मजबूरी का फायदा चीन उठा रहा है। भूटान के जस्ट ऊपर तिब्बत है जिसको चीन ने 1959 से इस पर अपना कब्जा कर रखा है। चीन, भूटान के कुछ हिस्से और भारत के अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों को तिब्बत का हिस्सा मानता है। चीन ने, भूटान के डोकलाम, जाकर लंग और पसंम लंग को अपना क्षेत्र बताया है।

डोकलाम विवाद क्या है?

पूर्वोत्तर भारत के सिलीगुड़ी कारीडोर पर चीन की नजर है। डोकलाम विवाद भारत और चीन के बीच का विवाद नहीं था बल्कि यह भूटान और चीन का मामला था, भारत ने भूटान की रक्षा के लिए अपनी सेना वहां पर भेजी थी। डोकलाम के क्षेत्र में जितना विवाद बढ़ेगा वह सिलीगुड़ी कारीडोर को प्रभावित करेगा।

भूटान की साकटेक वाइल्ड लाइफ सेंचुरी पर चीन कर रहा है अपना दावा

चीन, भूटान से पहले डोकलाम,जाकर लंग और पसंम लंग को ही मांगता था लेकिन पिछले साल पर्यावरण मीटिंग में दुनिया भर में फंड जारी किया गया था की किस देश में नेशनल पार्क के लिए कितना फंड दिया जाए। इसी फंड में भूटान की साकटेक वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के लिए जब फंड बनाया जा रहा था तभी चीन यह बोल पड़ा कि साकटेक हमारा है तो आप लोग भूटान को पैसा क्यों दे रहे हैं। भारत ने तुरंत इस बात का विरोध किया और बताया कि साकटेक भूटान का हिस्सा है, चीन उसे अपना कैसे अपना बता रहा है।

भूटान तीन-स्तरीय वार्ता से क्या चाहता है?

धीरे-धीरे चीन, भूटान के कई हिस्सों को अपना बताता जा रहा है। Bhutan and China के बीच की सीमा रेखा 407 किलोमीटर लंबी है। भारत और भूटान के बीच 699 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा है। आने वाले समय में चीन भूटान के इन हिस्सों को अपना बताने लगा तो भूटान को बहुत सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

भारत और चीन के बीच की सीमा रेखा 3488 किलोमीटर लंबी है। जिनमें अधिकांश क्षेत्र विवादित है। भूटान यह चाहता है कि भूटान और चीन के बीच तीन-स्तरीय वार्ता से एक बार यह स्पष्ट सीमा रेखा बन जाए जिससे कि सीमा विवाद समाप्त हो जाए।

भारत को इससे क्या दिक्कत होगा?

बिना भारत के किसी समर्थन के भूटान यदि चीन से कोई बात करता है तो यह संभव है कि वह अपनी सीमा रेखा तो बचा लेगा लेकिन इसके बदले में चीन को अपने यहां पर कोई सैन्य अड्डा दे सकता है। अगर चीन भूटान में कोई सैन्य अड्डा या अपना कोई इन्वेस्ट करता है तो आने वाले समय में भारत के लिए भी दिक्कत हो सकता है।

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