Why did Facebook change its name? फेसबुक ने अपना नाम क्यों बदला?

Why did Facebook change its name : इस समय सभी लोगों में यह जिज्ञासा है कि हमारे मोबाइल में जो Facebook का निशान है वह फेसबुक से बदलकर कब तक Meta हो जाएगा। अमेरिका के अंदर मार्क जकरबर्ग ने ऐलान किया है कि अब हम फेसबुक का नाम बदलकर मेटा रख दिया गया है। नाम बदलने के बाद यदि कोई व्यक्ति गूगल पर Facebook सर्च करता है तो वह अब Meta के नाम से शो होगा।

Why did Facebook change its name
Why did Facebook change its name

ऐसा क्या हुआ जो फेसबुक ने अपना नाम बदल लिया?

आज से लगभग 23 साल पहले अमेरिका के अंदर एक कंपनी बनी थी जिसका नाम गूगल रखा गया था। YouTube भी गूगल का ही एक प्रोडक्ट है। 23 साल पहले 1998 में जिस गूगल को आप लोगों ने बनते हुआ देखा वह एक प्रोडक्ट है। 2015 में गूगल निर्माताओं को यह समझ में आया कि हमने तो एक ब्रांड बना लिया है लेकिन अब एक कंपनी बनाने की भी जरूरत है। तब जाकर के अल्फाबेट का निर्माण हुआ। यानी गूगल की पेरेंट्स कंपनी बनी अल्फाबेट।

सम्मान्यतः पेरेंट्स तो बच्चों को जन्म देते हैं, लेकिन आजकल तो ट्रेंड उल्टा हो गया है जिसमें यह जो ऑनलाइन की दुनिया है वह अपने पेरेंट्स को जन्म दे रहे है ऐसा ही अब हुआ है, जिस प्रकार गूगल और यूट्यूब ने अल्फाबेट को अपना पेरेंट्स बना लिया है ठीक उसी प्रकार फेसबुक ने यह कहा है कि अब मेरे पेरेंट्स का नाम Meta होगा। यानी अब पेरेंट्स कंपनी Fecebook.com नहीं Meta.com के नाम से जानी जाएगी। 1 दिसंबर से जब आप ट्रेडिंग करने के लिए जाएंगे तो फेसबुक की नहीं, अब आप मेटा की ट्रेडिंग करेंगे।

अचानक इतना बड़ा नाम परिवर्तन कैसे हो गया है?

फेसबुक बहुत दिनों से यह बयान दे रहा है कि मिलना जुलना अब अपनत्व के बीच होगा। अवतार मूवी के अंदर जिस प्रकार हीरो हीरोइन दीखे थे कुछ इस प्रकार का होगा। आने वाले समय में फेसबुक यह सोच रहा है कि कुछ इस प्रकार की टेक्नोलॉजी विकसित की जाए जिससे कोई दूर बैठा व्यक्ति को हम अपने यहां पर ही देख पाए।

उदाहरण के लिए यदि कोई टीचर ऑनलाइन यूट्यूब पर पड़ा रहा है तो यूट्यूब देखने वाले को यह समझ आ जाय की जो टीचर है वह उसके पास ही पड़ा रहा है। इसी काम को करने के लिए फेसबुक ने अपना नाम बदल लिया है, जो अब इंटरनेट की दुनिया में बहुत बड़ी क्रांति लाने जा रहा है।

जिसका नाम है मेटा वर्ष, मेटा वर्ष की दुनिया का मतलब यह है कि आज से बहुत आगे की दुनिया जिसकी कल्पना आज से अगर शुरू की जाए तो लगभग 15 वर्षों में पूरी होंगी। ऐसा फेसबुक के मालिक मार्क जकरबर्ग का कहना है।

फेसबुक के तीन प्रोडक्ट फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप इन तीनों के नाम नहीं बदलेंगे इनके नाम के साथ साथ ऊपर एक और कंपनी बैठ जाएगी जिसका नाम मेटा होने वाला है।

मेटा वर्ष का इतिहास क्या है?

आज से लगभग 25 साल पहले नील स्टीफन ने Science Fiction Novel लिखा गया था जिसका नाम Snow Crash रखा गया था। नील स्टीफन ने अपने इमेजनरी किरदारों का नाम मेटा वर्ष दिया था। यानी एक ऐसी दुनिया जो सामान्य दुनिया से काफी आगे है। मार्क जकरबर्ग कहते हैं कि हम यदि सोशली मेटा वर्ष की दुनिया में चले गए तो आने वाले समय में क्या कुछ कर सकते हैं जिसमें आप अपने दोस्तों के साथ इमेजिनरी रूप से खेल सकते हैं,

अंतरिक्ष में उड़ते हुए अपने दोस्तों को देख सकते हैं। एक ऐसी दुनिया जिसकी कल्पना आप इसलिए कर सकते हैं क्यों कि आप मेटा वर्ष की दुनिया में है। आप सब अपने- अपने घरों में है लेकिन मेटा वर्ष की दुनिया आप लोगों के लिए बिल्कुल अलग तरीके से डिजाइन की गई है जिसमें आप अपनी उपस्थिति बिना वहां पर गए हुए दर्ज करा सकते हैं।

मेटा वर्ष की दुनिया कैसी होगी?

मान लीजिए कि आप पढ़ाई करने के लिए अपने बच्चों के साथ बैठे हैं और ब्रह्मांड के बारे में जानकारी लेना चाहते हैं, तो आपने अपनी आंखों पर एक चश्मा लगाया जिसमें ब्रह्मांड की सारी जानकारी आपको बैठे-बैठे ही मिल जाए।

यह 3D प्रकार का इमेजिनरी चश्मा है जिसे यदि आप अपने आंखों पर धारण करते है और एक ऐसे भी इमेजिनरी दुनिया में चले जाते है जिस दुनिया के अंदर आप सूर्य, ब्रह्मांड और अपने आप को इमेजिन कर पा रहे है।

यह सारी चीजें एजुकेशन के क्षेत्र में पॉसिबल होंगी। यह सारी चीजें तभी पॉसिबल होंगी जब आपने मेटा वर्ष से बनी चश्मा को पहना और आप इमेजनरी दुनिया में पहुंच गए। यह पूरी प्रक्रिया फेसबुक, मेटा के माध्यम से करने जा रहा है।

विचार करिए कि आपको एक कंसल्ट देखना है जो इस समय टोक्यो में चल रहा है जिसे आपने अपने इंस्टाग्राम पर देख रहे है और आपको वहां पर जाना है तो आप सिर्फ वह चश्मा लगाए और आपके आंखों के सामने टोक्यो में चल रहे कंसल्ट का 3D इमेज आ जाय जिससे आपको यह लगे कि आप वहां पर खुद पहुंच गए हैं और वहां पर हो रहे कंसल्ट में आप लाइव उपस्थित हो गए हैं ऐसी फिल्म आने लगे। ऐसी ही व्यवस्था फेसबुक मेटा के माध्यम से करने जा रहा है।

यदि आप अपने किसी दोस्त के साथ वीडियो गेम खेल रहे हैं, तो आप यह मानते हैं कि जो हमारा मित्र है वह कहीं दूर बैठकर यह गेम खेल रहा है। लेकिन यदि आप मेटा वर्ष की चश्मा धारण कर लिए हैं तो आपका मित्र वहीं पर वर्चुअल ही बैठा दिखेगा जो आपके साथ खेलना चाहता है। एक इमेजिनरी दुनिया की कल्पना आप कर सकते हैं जो मेटा वर्ष के माध्यम से संभव होने जा रहा है।

मेटा वर्ष की तकनिकी दुनिया में विकसित करना इतना आसान होने वाला है क्या?

यह करना इतना आसान भी नहीं होने वाला है ऐसा करने के लिए पूरी दुनिया को 3D तकनीकी माध्यम से जोड़ना पड़ेगा। आज तक जो भी प्रोडक्ट 2 डायमेंशाली देखते आए हैं वह अब 3 डायमेंशाली में देखना होगा, ऐसी होगी मेटा वर्ष की दुनिया।

आपके यहां आंखों पर VR हेडसेट लगा दिया जाय जिसे पहनकर आप अपने घर से ही अपनी कंपनी के काम को करने जैसी फीलिंग आ रही हो जहां से आप अपनी कंपनी में काम कर रहे हो और अपने वर्कर्स को देख और उन्हें कंट्रोल कर रहे हो। यह VR सेट कोई कैमरा नहीं होगा बल्कि 3 वर्ड का रियल एनालिसिस आपके आंखों के सामने होगा।

कुछ ऐसी होगी मेटा वर्ष की दुनिया जिस पर फेसबुक ने काम करना शुरू कर दिया है। जिसका सीधा अर्थ है बियोंड यानी ऐसी चीज है जिसे आपने अब तक सिर्फ अपने से दूर ही देखा था लेकिन अब वह रियल वार्ड में आपके सामने आने लगेंगी।

दूसरी कंपनियों ने इसके बारे में कभी नहीं सोचा है क्या?

फेसबुक के बाद माइक्रोसॉफ्ट भी अपनी तरफ से Mesh नाम के प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। माइक्रोसॉफ्ट ने Mesh नाम से इस पर काम करने के लिए अपना प्रोजेक्ट चला रहा है। गूगल ने भी Starline नाम से अपना प्रोजेक्ट चला रहा है।

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