सरकार ने क्यों बेचे एयर इंडिया Why did the government Sell Air India

Why did the government Sell Air India. साथियों भारत के लिए यह एक ऐसी खबर है जिस खबर का इंतजार लगभग 10 वर्षो से भारत के लोग कर रहे थे। सामान्यतः जब कोई सरकारी कंपनी बिकती है तो लोगों को बड़ा दु:ख होता है। लोग यह सोचते हैं की सरकार प्राइवेटाइजेशन को बढ़ावा दे रही है। लेकिन यह खबर एक ऐसी खबर थी जिन को सुनने के बाद लोगों का सरकार के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया रही।

हवाई जहाज के क्षेत्र में एयर इंडिया का क्या योगदान है ?

हवाई जहाज के क्षेत्र भारत के द्वारा किए गए कृतिमानो मे एयर इंडिया का नाम सबसे ऊपर आता है। जिसने भारत ही नहीं दुनिया के अंदर भी इस बात का लोहा मनवाया की भारत के अंदर एक ऐसी एयरलाइंस है जो अंतरराष्ट्रीय उड़ाने भरा करती हैं। देश की आजादी से पहले भी यह एयरलाइंस उपस्थित थी।

सरकार ने क्यों बेचे एयर इंडिया Why did the government Sell Air India

सरकार ने एयर इंडिया किसे बेच दी है?

जैसा कि आप सभी जानते होंगे सरकार ने यह एयरलाइंस टाटा संस को बेच दी है। यह एयरलाइंस पहले भी टाटा संस के पास ही थी। उस समय जमशेदजी टाटा, टाटा एयरलाइंस के चेयरमैन थे। टाटा एयरलाइंस को सरकार ने अपने अंडर में ले लिया और टाटा एयरलाइंस का नाम बदलकर एयर इंडिया कर दिया।

उस समय सरकार ने इस एयरलाइंस से काफी मुनाफा कमाया लेकिन सरकार को इससे बाद में काफी घाटा होने लगा । जिसके बाद सरकार ने इसे बेचने का फैसला किया और 10 वर्षो के लंबे इंतजार के बाद इस एयरलाइंस को टाटा संस को बेच दिया। एयर इंडिया को खरीदने के बाद रतन टाटा ने अपने एक ट्वीट में यह कहा कि वेलकम बैक एयर इंडिया अर्थात एयर इंडिया एक बार फिर आपका स्वागत है।

टाटा ने एयर इंडिया को कितने में खरीदा है ?

साथियों हाल ही में टाटा कंपनी ने 18 हजार करोड़ रुपए में बोली लगाकर सरकार से खरीद लिया है। जब इस एयरलाइंस को बेचने के लिए बोली लगाई जा रही थी तब इसे खरीदने के लिए भारत के 2 सबसे अमीर आदमी रतन टाटा (टाटा कंपनी के वर्तमान चेयरमैन) और अजय सिंह जो स्पाइसजेट के मालिक है वह भी मौजूद थे।

अजय सिंह ने इस एयरलाइंस को खरीदने के लिए 15 हजार करोड़ों रुपए की बोली लगाई थी। जीने से 3 हजार करोड़ों रुपए ज्यादा की बोली लगाकर रतन टाटा ने खरीद ली।

ऐसी क्या मजबूरी थी जिसके चलते भारत सरकार ने एयर इंडिया को बेच दिया?

यह एयरलाइंस सरकारी एयरलाइंस है जो इस समय काफी घाटे में चल रही थी। सरकार की बात माने तो यह कंपनी इस समय लगभग 60 हजार करोड रुपए की घाटी में थी। भारत सरकार ने इस घाटे से उबरने के लिए कई बार निवेशकों को निमंत्रण दिया है कि निवेशक आए और पैसा लगाए।

लेकिन ऐसा कुछ भी होता हुआ नही दिखा बल्कि यह एयरलाइंस और भी घाटे में चली गई। ऐसी स्थिति में सिर्फ एक ही विकल्प था कि भारत सरकार इस एयरलाइंस को बेच दे। सरकार ने इसे 18 हजार करोड़ रुपए में बेच भी दिया है लेकिन इसमें से 15.5 हजार करोड रुपए वह जो घाटा है उसे पूरा करने के लिए दे देगी बाकी नगद के रूप में उसे ढाई हजार करोड़ रुपए ही मिलेंगे। इसके अतिरिक्त जो भी घाटा है उसे सरकार खुद सहेन करेगी।

एयर इंडिया का इतिहास क्या है?

जिस इंडियन एयरलाइंस की हम बात कर रहे हैं उसके बारे में कहा जाता है कि जिस प्रकार कोई सरकारी गाड़ी होती है सरकारी ट्रेन होती है ठीक उसी प्रकार यह सरकारी हवाई जहाज है। भारत के जितने भी सांसद हैं वह लोग भी इसी हवाई जहाज से सफर करना सही मानते थे।

एयर इंडिया के पास वर्तमान में 172 एयरक्राफ्ट है।

भारत के सबसे पहले लाइसेंस प्राप्त पायलट में जमशेदजी टाटा का नाम आता है। 10 फरवरी 1929 को जेआरडी टाटा को पायलट का लाइसेंस मिला था । टाटा पहले भारतीय थे जिन्हें प्लेन उड़ाने का लाइसेंस मिला था ।

जेआरडी टाटा ने भारत के लिए पहली फ्लाइट भी उड़ाई थी। जो 15 अक्टूबर 1932 में कराची से मुंबई के बीच मे उड़ाई थी। यही टाटा एयरलाइंस आगे चलकर भारत की सरकारी कंपनी बनी।

दुनिया में धीरे-धीरे टाटा एयरलाइंस का कारोबार बढ़ने लगा। अंग्रेज उस समय भारत से जाने वाले ही थे ठीक उसी समय पूरे विश्व में द्वितीय विश्व युद्ध होने लगी। जिसके चलते एक देश से दूसरे देश में आने जाने पर रोक लग गई। यही कारण था कि टाटा एयरलाइंस घाटे में चलने लगी।

टाटा एयरलाइंस को सरकार ने अपने अंडर में ले लिया। जिसका 1946 में नाम बदलकर एयर इंडिया कर दिया गया। उस समय बहुत सारी कंपनियों को सरकार ने अपने अंडर में लेकर उनका राष्ट्रीयकरण कर दिया। सरकार की यह मंशा थी कि जो कंपनियां इस समय घाटे में चल रही हैं उसे अपने अंडर में लेकर और अपने पास से पैसा लगाकर उनको घाटे से उबर आजा सके।

जिसके लिए भारत ने अपने यहां एक कानून बनाया । जिसको एयर कारपोरेशन एक्ट 1953 का कहा गया। जिसके अंदर भारत में मौजूद जितने भी विमान सेवाएं थी उनका राष्ट्रीयकरण किया गया।

लोगों को किसी बात की परेशानी ना हो सके इसके लिए सरकार ने इन एयरलाइंस को दो भागों में बांट दिया जिनमें पहला नाम एयर इंडिया का और दूसरा इंडियन एयरलाइंस का रखा दिया गया । यह दोनों ही सरकारी कंपनी थी।
इनमें से जो इंडियन एयरलाइंस थी उनमें सिर्फ भारत में घरेलू उड़ाने भरने की इजाजत मिली और जो एयर इंडिया थी वह अंतरराष्ट्रीय उड़ाने भरने लगी।

2007 में सरकार ने इन दोनों बड़ी कंपनिय इंडियन एयरलाइंस और एयर इंडिया को एक में मिला दिया। जिसका नाम सिर्फ एयर इंडिया ही रह गया।

सन 2000 से लेकर 2006 तक एयर इंडिया मुनाफा कमा रही थी लेकिन उसके बाद कंपनी की आय कम होती गई। जिससे कर्ज बढ़ गया और कंपनी पर 31 मार्च 2019 तक 60 हजार करोड रुपए से भी ज्यादा कर्ज हो गया।
लेकिन इसे बेचने के बाद सरकार को आगे आने वाले खर्चे पर राहत मिल गई ।

साथियों इस राहत के साथ साथ यह भी उम्मीद की जा रही है कि प्राइवेट कंपनी होने के नाम पर टाटा देश में अब इसे कॉम्पिटेटिव मार्केट में लेकर आएगी।

लोगों को अच्छी सुविधाएं देगी। जिससे एयर इंडिया का नाम भी भारत की उन कंपनियों मे ऊपर आएगा जो कंपनियां भारत में हवाई सफर कराती है। लेकिन एयर इंडिया के जितने भी कर्मचारी है उन पर बेरोजगार होने की संकट आ गई है।

भारत में सार्वजनिक संपत्ति को बेचने का काम Department of Investment and Public Asset Management द्वारा किया जाता है।

निष्कर्ष

आज के इस लेख में हमने जाना की सरकार ने क्यों बेचे एयर इंडिया Why did the government sell Air India. हम उम्मीद करते हैं की आपको सभी को आज का हमारा यह लेख सरकार ने क्यों बेचे एयर इंडिया Why did the government sell Air India पसंद आया होगा ।

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